PRAGATI फ्लैगशिप प्लेटफॉर्म
भारत सरकार के सुशासन (Good Governance) और परियोजनाओं के समय पर क्रियान्वयन के सबसे शक्तिशाली माध्यम PRAGATI (Pro-Active Governance and Timely Implementation) ने अपनी 50वीं बैठक के साथ एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक ने यह साबित कर दिया है कि तकनीक और सीधे संवाद के जरिए देश के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की तस्वीर बदली जा सकती है।
क्या है PRAGATI और क्यों है यह खास?
वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च किया गया PRAGATI प्लेटफॉर्म एक बहु-उद्देश्यीय और इंटरैक्टिव डेशबोर्ड है। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- सीधा संवाद: प्रधानमंत्री सीधे राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्रीय सचिवों के साथ संवाद करते हैं।
- रियल-टाइम मॉनिटरिंग: यह प्लेटफॉर्म महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और जनता की शिकायतों की वास्तविक समय में निगरानी सुनिश्चित करता है।
- त्वरित समाधान: फाइलों के चक्कर में फंसे प्रोजेक्ट्स को ऑन-द-स्पॉट क्लीयरेंस और दिशा-निर्देश मिलते हैं।
50वीं बैठक: कैबिनेट सचिव ने साझा किए नतीजे
2 जनवरी को हुई इस ऐतिहासिक बैठक के बाद कैबिनेट सचिव और विभिन्न विभागों के सचिवों ने मीडिया को PRAGATI की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी।
- स्ट्रक्चर्ड मैकेनिज्म: ब्रीफिंग में बताया गया कि कैसे इस प्लेटफॉर्म ने मुद्दों को ‘एस्केलेट’ (बढ़ाने) और उन्हें सुलझाने के लिए एक व्यवस्थित ढांचा तैयार किया है।
- सिस्टमैटिक मॉनिटरिंग: यह प्लेटफॉर्म केंद्र और राज्य सरकारों के बीच की कड़ियों को जोड़ते हुए हर स्तर पर जवाबदेही तय करता है।
सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का अनूठा उदाहरण
PRAGATI प्लेटफॉर्म को सहकारी संघवाद के सबसे बेहतरीन उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। यह एक ऐसा डिजिटल इंटरफेस है जहाँ:
- केंद्र सरकार
- राज्य सरकारें
- केंद्रीय मंत्रालय
तीनों एक ही स्क्रीन पर एक साथ मौजूद होते हैं, जिससे समन्वय (Coordination) की कमी दूर होती है और राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट्स में देरी की गुंजाइश खत्म हो जाती है।
एक दशक की उपलब्धियां और भविष्य की राह
पिछले 11 वर्षों (2015-2026) के दौरान, PRAGATI ने केवल मॉनिटरिंग ही नहीं की, बल्कि देश में जवाबदेही की संस्कृति (Culture of Accountability) विकसित की है।
- निर्णय लेने में तेजी: जो प्रोजेक्ट सालों तक अटके रहते थे, उनके फैसले अब हफ्तों में हो रहे हैं।
- देरी का समाधान: भूमि अधिग्रहण, वन विभाग की मंजूरी और फंड आवंटन जैसे मुद्दों को सुलझाने में यह प्लेटफॉर्म मील का पत्थर साबित हुआ है।
- गवर्नेंस रिफॉर्म: यह केवल समीक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि शासन सुधारों (Governance Reforms) के लिए एक प्रयोगशाला बनकर उभरा है।


