पीएम राहत (PM RAHAT) योजना के शुभारंभ को मंजूरी
‘सेवा तीर्थ’ (नये पीएमओ) में स्थानांतरित होने के बाद अपने पहले ही बड़े फैसले में, प्रधानमंत्री ने पीएम राहत (PM RAHAT – Road Accident Victim Hospitalization and Assured Treatment) योजना के शुभारंभ को मंजूरी दी है।
यह योजना सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता प्रदान कर बहुमूल्य जीवन बचाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
पीएम राहत योजना की मुख्य विशेषताएं
इस योजना को यह सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है कि सड़क दुर्घटना के बाद ‘गोल्डन ऑवर’ (दुर्घटना के बाद का पहला घंटा) में बिना किसी वित्तीय बाधा के इलाज मिल सके।
- कैशलेस उपचार: प्रत्येक पात्र पीड़ित को किसी भी श्रेणी की सड़क पर दुर्घटना होने पर ₹1.5 लाख तक के मुफ्त इलाज का अधिकार होगा।
- समय सीमा: यह लाभ दुर्घटना की तारीख से 7 दिनों की अवधि के लिए मान्य होगा।
- स्थिरीकरण (Stabilization): * गैर-जानलेवा मामलों में 24 घंटे तक।
- जीवन के लिए खतरनाक (Life-threatening) मामलों में 48 घंटे तक।
तकनीक और कार्यान्वयन का ढांचा
योजना को पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए दो बड़े प्लेटफार्मों को जोड़ा गया है:
- eDAR: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का ‘इलेक्ट्रॉनिक विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट’ प्लेटफॉर्म।
- TMS 2.0: नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) का ‘ट्रांजैक्शन मैनेजमेंट सिस्टम’।
प्रक्रिया: दुर्घटना की रिपोर्टिंग से लेकर अस्पताल में भर्ती, पुलिस सत्यापन, उपचार और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया इस एकीकृत डिजिटल सिस्टम के माध्यम से निर्बाध रूप से चलेगी।
वित्तीय व्यवस्था और भुगतान
अस्पतालों को भुगतान मोटर वाहन दुर्घटना कोष (MVAF) के माध्यम से किया जाएगा:
- बीमाकृत वाहन: यदि दुर्घटना करने वाले वाहन का बीमा है, तो भुगतान बीमा कंपनियों के योगदान से होगा।
- हिट एंड रन/बिना बीमा वाले वाहन: ऐसे मामलों में भारत सरकार अपने बजटीय आवंटन से भुगतान करेगी।
- त्वरित भुगतान: अस्पतालों को वित्तीय निश्चितता देने के लिए ‘स्टेट हेल्थ एजेंसी’ द्वारा अनुमोदित दावों का भुगतान 10 दिनों के भीतर किया जाएगा।
शिकायत निवारण
पीड़ितों की समस्याओं के समाधान के लिए जिला सड़क सुरक्षा समिति (जिलाधिकारी की अध्यक्षता में) द्वारा नामित एक ‘शिकायत निवारण अधिकारी’ नियुक्त किया जाएगा।
महत्व: अध्ययनों के अनुसार, यदि सड़क दुर्घटना पीड़ितों को पहले एक घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचा दिया जाए, तो लगभग 50% मौतें रोकी जा सकती हैं। पीएम राहत योजना इसी ‘जीवन रक्षक’ हस्तक्षेप को प्राथमिकता देती है।


