राष्ट्रपति मुर्मू ने 11 शास्त्रीय भाषाओं के लिए ‘ग्रंथ कुटीर’ का किया उद्घाटन

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 23 जनवरी को राष्ट्रपति भवन में ‘ग्रंथ कुटीर’ (शास्त्र पुस्तकालय) का उद्घाटन कर भारतीय विरासत के संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। यह पहल राष्ट्रपति भवन द्वारा औपनिवेशिक विरासत (Colonial Legacy) के प्रतीकों को हटाकर भारतीय सांस्कृतिक और बौद्धिक मूल्यों को स्थापित करने के प्रयासों का एक प्रमुख हिस्सा है।

ब्रिटिश काल की किताबों की जगह लेंगे भारतीय शास्त्र

हाल तक इस स्थान पर लॉर्ड कर्जन के भाषण, उनके प्रशासन के सारांश, विलियम होगार्थ की कृतियों की सूची और ब्रिटिश शासन से जुड़ी अन्य पुस्तकें रखी जाती थीं। अब ‘ग्रंथ कुटीर’ के माध्यम से इस स्थान को भारत की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को समर्पित कर दिया गया है।

11 शास्त्रीय भाषाओं का अद्भुत संग्रह

इस पुस्तकालय में लगभग 2,300 पुस्तकें और पांडुलिपियाँ शामिल हैं, जो भारत की सभी 11 शास्त्रीय भाषाओं के गौरवशाली इतिहास को प्रदर्शित करती हैं:

  • पुरानी मान्यता प्राप्त भाषाएं: तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिया।
  • नई शामिल भाषाएं (अक्टूबर 2024): मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली।

प्रमुख आकर्षण और सामग्री

  • पारंपरिक पांडुलिपियाँ: संग्रह में लगभग 50 दुर्लभ पांडुलिपियाँ हैं, जो ताड़ के पत्तों, छाल, कपड़े और पारंपरिक कागजों पर हस्तलिखित हैं।
  • विविध विषय: यहाँ महाकाव्य, दर्शन, भाषा विज्ञान, इतिहास, शासन कला (Governance), विज्ञान और भक्ति साहित्य का विशाल खजाना उपलब्ध है।
  • संविधान: विशेष रूप से, भारत का संविधान भी इन सभी शास्त्रीय भाषाओं में यहाँ उपलब्ध कराया गया है।

सांस्कृतिक महत्व

यह कदम भारत की दार्शनिक और बौद्धिक विरासत को जीवंत करने की एक कोशिश है। 3 अक्टूबर, 2024 को केंद्रीय कैबिनेट द्वारा पांच नई भाषाओं को ‘शास्त्रीय’ दर्जा दिए जाने के बाद, यह पुस्तकालय अब देश की भाषाई विविधता का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है।

error: Content is protected !!