राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘ओल चिकी’ लिपि में भारत का संविधान जारी किया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हाल ही में राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान संथाली भाषा में भारत के संविधान का विमोचन किया। यह पहला अवसर है जब देश का सर्वोच्च कानून संथाली समुदाय की अपनी लिपि ‘ओल चिकी’ (Ol Chiki) में उपलब्ध कराया गया है।

संथाली समुदाय के लिए गौरव का क्षण

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि यह सभी संथाली भाषी लोगों के लिए गर्व और अपार खुशी का विषय है। अब समुदाय के लोग अपनी मातृभाषा और लिपि में संविधान के प्रावधानों को पढ़ और समझ पाएंगे। राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि यह पहल लोकतांत्रिक मूल्यों को जमीनी स्तर तक पहुँचाने और आदिवासी समाज को सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।

ओल चिकी लिपि का शताब्दी वर्ष

यह आयोजन इसलिए भी विशेष है क्योंकि इस वर्ष ओल चिकी लिपि का शताब्दी वर्ष (Centenary Year) मनाया जा रहा है। राष्ट्रपति ने केंद्रीय विधि और न्याय मंत्रालय की सराहना की कि उन्होंने इस ऐतिहासिक वर्ष को यादगार बनाने के लिए संविधान को इस लिपि में प्रकाशित करने का महत्वपूर्ण कार्य पूरा किया।

संवैधानिक और भाषाई महत्व

  • आठवीं अनुसूची: संथाली भाषा को 92वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के माध्यम से भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था।
  • प्राचीन विरासत: संथाली भारत की सबसे प्राचीन जीवित भाषाओं में से एक मानी जाती है।
  • भौगोलिक विस्तार: यह मुख्य रूप से झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार में रहने वाले आदिवासी समुदायों द्वारा व्यापक रूप से बोली जाती है।
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