संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर
भारत सरकार ने देश में संधारणीय खेती (Sustainable Farming) को बढ़ावा देने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए ‘संतुलित उर्वरक उपयोग’ (Balanced Fertilization) को एक प्रमुख रणनीति के रूप में अपनाने पर जोर दिया है।
समाचार के मुख्य बिंदु:
1. मिट्टी की सेहत और उत्पादकता का संतुलन: समीक्षा में कहा गया है कि हरित क्रांति के बाद नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों (जैसे यूरिया) पर अत्यधिक निर्भरता के कारण मिट्टी के स्वास्थ्य में गिरावट आई है। अब सरकार का ध्यान केवल पैदावार बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) के संतुलन को बहाल करने पर भी है।
2. सॉइल हेल्थ कार्ड (SHC) स्कीम: 2015 में शुरू हुई सॉइल हेल्थ कार्ड (SHC) स्कीम किसानों को हर ज़मीन के लिए साइंटिफिक तरीके से बनाई गई, प्लॉट के हिसाब से डायग्नोस्टिक रिपोर्ट देती है, जो साइंटिफिक मिट्टी की टेस्टिंग पर आधारित होती है। यह कार्ड मैक्रोन्यूट्रिएंट्स समेत बारह खास पैरामीटर पर मिट्टी की हेल्थ की जांच करता है।
3. पीएम-प्रणाम (PM-PRANAM) योजना: केमिकल फर्टिलाइजर के उपयोग को कम करने के लिए ‘पीएम-प्रणाम’ योजना के तहत राज्यों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान, 14 राज्यों ने पिछले तीन वर्षों के औसत की तुलना में रसायनिक उर्वरकों की खपत में 15.14 लाख मीट्रिक टन की कमी दर्ज की है।
4. नैनो फर्टिलाइजर और नई तकनीक: सरकार नैनो यूरिया और नैनो डीएपी (DAP) के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। ये न केवल उपयोग में आसान हैं, बल्कि पौधों द्वारा अधिक कुशलता से अवशोषित किए जाते हैं, जिससे बर्बादी कम होती है। इसके छिड़काव के लिए ड्रोन तकनीक को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
5. नीम कोटेड यूरिया और सब्सिडी: यूरिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार ने 100% नीम कोटिंग अनिवार्य कर दी है। इसके अलावा, फॉस्फेटिक और पोटाश (P&K) उर्वरकों के लिए ‘पोषक तत्व आधारित सब्सिडी’ (NBS) व्यवस्था लागू है, जिसमें जिंक और बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों से युक्त उर्वरकों पर अतिरिक्त सब्सिडी दी जाती है।
6. कड़ी कार्रवाई: अवैध बिक्री और कालाबाजारी पर लगाम: खरीफ और रबी सीजन 2025-26 के दौरान उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने व्यापक अभियान चलाया है। अब तक:
- 14,692 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।
- 6,373 लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए।
- 766 एफआईआर (FIR) दर्ज की गई हैं।
7. जैविक खेती को बढ़ावा: ‘परंपरागत कृषि विकास योजना’ (PKVY) के तहत अब तक 16.90 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया गया है, जहाँ किसानों को जैविक खाद और कंपोस्ट के उपयोग के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है।


