पोलैंड का निर्णय: ओटावा कन्वेंशन और बारूदी सुरंगें

पोलैंड ने अपनी सीमाओं पर बारूदी सुरंगों को तेजी से तैनात करने की योजना की घोषणा की है। इसके साथ ही पोलैंड ने ओटावा कन्वेंशन (Ottawa Convention) से बाहर निकलने का संकेत दिया है, जिससे इस कदम का मार्ग प्रशस्त होगा।

ओटावा कन्वेंशन (Anti-Personnel Mine Ban Treaty) क्या है?

  • उद्देश्य: यह एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है जो एंटी-पर्सनल (जनशक्ति-विरोधी) बारूदी सुरंगों के उपयोग, भंडारण, उत्पादन और हस्तांतरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है।
  • इतिहास: इस कन्वेंशन को 18 सितंबर 1997 को ओस्लो में अंतिम रूप दिया गया था। दिसंबर 1997 में कनाडा के ओटावा में इसे हस्ताक्षर के लिए खोला गया, इसीलिए इसे ‘ओटावा कन्वेंशन’ कहा जाता है।
  • प्रभावी तिथि: यह संधि 1 मार्च 1999 से प्रभावी हुई।

बारूदी सुरंगों के प्रकार और प्रभाव

बारूदी सुरंगें मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं:

प्रकारविवरणओटावा कन्वेंशन की स्थिति
एंटी-पर्सनल माइंसइंसानों (सैनिकों या नागरिकों) को निशाना बनाने के लिए डिज़ाइन की गई।पूर्णतः प्रतिबंधित
एंटी-व्हीकल माइंसटैंकों या अन्य सैन्य वाहनों को नष्ट करने के लिए।कुछ सीमाओं के साथ अनुमति

वैश्विक परिदृश्य और हस्ताक्षरकर्ता

ओटावा कन्वेंशन पर कुल 133 देशों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, दुनिया के कई शक्तिशाली देशों ने सुरक्षा कारणों से इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं:

  • गैर-हस्ताक्षरकर्ता देश: भारत, पाकिस्तान, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों ने इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
  • पोलैंड की स्थिति: पोलैंड अब उन देशों में शामिल होने की राह पर है जो अपनी रक्षा रणनीतियों में लैंडमाइंस के उपयोग को आवश्यक मानते हैं।

मानवीय प्रभाव: बारूदी सुरंगें संघर्ष समाप्त होने के लंबे समय बाद भी निर्दोष नागरिकों और राहगीरों को मारती या घायल करती रहती हैं, जिससे दशकों तक मानवीय पीड़ा बनी रहती है।


क्या पोलैंड का यह कदम सुरक्षा चिंताओं के कारण है?

आमतौर पर सीमावर्ती देशों द्वारा इस तरह के कदम क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों या आस-पड़ोस में बढ़ते सैन्य तनाव के जवाब में उठाए जाते हैं। पोलैंड का यह निर्णय यूरोपीय सुरक्षा वास्तुकला में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है।

पोलैंड द्वारा बारूदी सुरंगों (Landmines) की तैनाती और ओटावा कन्वेंशन से हटने के संकेत का यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से एक बड़ा नीतिगत बदलाव है।

error: Content is protected !!