फिस्कल हेल्थ इंडेक्स 2026

नीति आयोग ने 11 मार्च को नई दिल्ली में फिस्कल हेल्थ इंडेक्स 2026 का दूसरा वार्षिक संस्करण जारी किया। यह रिपोर्ट राज्यों में वित्तीय स्वास्थ्य को मजबूत करने के लिए कई नीतिगत प्राथमिकताओं को रेखांकित करती है। इनमें राजस्व संकलन को बढ़ाना और राज्यों की कर क्षमता को सुदृढ़ करना, राजकोषीय लचीलापन बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध व्ययों का युक्तिकरण करना, तथा पूंजीगत व्यय की संरचना और गुणवत्ता में सुधार करना शामिल है।

सूचकांक का विस्तार और समावेशिता

  • व्यापक कवरेज: पिछले संस्करण में केवल 18 प्रमुख राज्यों का मूल्यांकन किया गया था, जबकि इस दूसरे संस्करण में 10 उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों को भी शामिल किया गया है।
  • विशिष्ट श्रेणी: क्षेत्रीय और संरचनात्मक अंतरों को देखते हुए, उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों का मूल्यांकन और रैंकिंग प्रमुख राज्यों से अलग की गई है।

राज्यों का प्रदर्शन (रैंकिंग)

श्रेणीशीर्ष प्रदर्शनकर्ता (Top Performers)निचले स्थान पर (Bottom)
शीर्ष 3 राज्य (Achievers)1. ओडिशा (स्कोर: 73.1)
2. गोवा
3. झारखंड
पंजाब, पश्चिम बंगाल और केरल
अन्य प्रमुख राज्यगुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और मध्य प्रदेश

नीतिगत प्राथमिकताएं (Policy Priorities)

रिपोर्ट में राज्यों के राजकोषीय स्वास्थ्य को मजबूत करने के लिए तीन प्रमुख क्षेत्रों पर जोर दिया गया है:

  1. राजस्व जुटाना (Revenue Mobilisation): राज्यों की अपनी कर क्षमता को मजबूत करना।
  2. प्रतिबद्ध व्यय का युक्तिकरण (Rationalising Committed Expenditures): वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान जैसे खर्चों को संतुलित करना ताकि राजकोषीय लचीलापन (Fiscal Flexibility) वापस मिल सके।
  3. पूंजीगत व्यय की गुणवत्ता (Quality of Capital Expenditure): बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों पर होने वाले खर्च की संरचना और गुणवत्ता में सुधार करना।
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