पूर्वोत्तर भारत की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF)

प्रधानमंत्री ने 14 फरवरी को असम के डिब्रूगढ़ जिले में मोरान बाईपास पर पूर्वोत्तर की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) का उद्घाटन किया।

यह परियोजना सामरिक और नागरिक सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसका विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है:

पूर्वोत्तर की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF)

  • उद्देश्य: इसे भारतीय वायुसेना के समन्वय से तैयार किया गया है ताकि आपात स्थिति के दौरान सैन्य और नागरिक विमानों की लैंडिंग और टेक-ऑफ में सहायता मिल सके।
  • क्षमता: राष्ट्रीय राजमार्ग के 4.2 किलोमीटर लंबे हिस्से को अपग्रेड किया गया है। सामान्य समय में यहाँ से भारी वाहन गुजरते हैं, लेकिन आपदा या आपात स्थिति में यह वायुसेना के लिए एक रनवे का काम करेगा।
  • लागत और समयसीमा: ₹99.86 करोड़ की लागत वाली इस चार-लेन ELF परियोजना की परिकल्पना 2021 में की गई थी और इसे 2025 में पूरा किया गया।

भव्य उद्घाटन और एयर डिस्प्ले

उद्घाटन के तुरंत बाद, भारतीय वायुसेना ने इस स्थल पर एक हवाई प्रदर्शन किया:

  • शामिल विमान: सुखोई Su-30MKI और राफेल (Dassault Rafale) जैसे लड़ाकू विमानों के साथ-साथ अन्य विमानों और हेलीकॉप्टरों ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया।
  • सफल परीक्षण: प्रधानमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में इन जेट विमानों ने विशेष रूप से मजबूत बनाए गए इस राजमार्ग खंड पर सफलतापूर्वक लैंडिंग और टेक-ऑफ किया।

सामरिक महत्व (Strategic Importance)

भारत-चीन सीमा के करीब स्थित होने के कारण, ऊपरी असम में भारत के सैन्य बुनियादी ढांचे के लिए इसे एक बड़ा रणनीतिक इजाफा माना जा रहा है:

  • विकल्प: यदि परिचालन बाधाओं या आपात स्थिति के कारण डिब्रूगढ़ हवाई अड्डा या चाबुआ वायु सेना स्टेशन अनुपलब्ध हो जाता है, तो यह सुविधा एक वैकल्पिक लैंडिंग विकल्प के रूप में कार्य करेगी।
  • सुरक्षा: यह आपदा प्रबंधन और युद्ध जैसी स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा।
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