NIRANTAR प्लेटफॉर्म
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने 12 जनवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक ‘NIRANTAR’ (नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड एप्लीकेशन ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज टू ट्रांसफॉर्म, अडैप्ट एंड बिल्ड रेजिलिएंस) प्लेटफॉर्म के भविष्य और इसके रणनीतिक उद्देश्यों पर केंद्रित थी।
क्या है ‘NIRANTAR’?
यह पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के तहत आने वाले विभिन्न संस्थानों का एक एकीकृत प्लेटफॉर्म है।
- उद्देश्य: विभिन्न शोध संस्थानों के बीच समन्वय और सहयोग को बेहतर बनाना।
- कार्यप्रणाली: यह प्लेटफॉर्म चार प्रमुख वर्टिकल (Verticals) पर काम करता है, जो शोध के विभिन्न पहलुओं, उनके परिणामों के आकलन और व्यावहारिक उपयोग पर केंद्रित हैं।
जियोपॉलिटिक्स और प्राकृतिक संसाधन
मंत्री श्री यादव ने प्राकृतिक संसाधनों के रणनीतिक और वैश्विक महत्व पर जोर देते हुए कुछ महत्वपूर्ण बातें कहीं:
- वैश्विक राजनीति: आज की वैश्विक राजनीति (Geopolitics) काफी हद तक इस बात पर टिकी है कि किसी देश के पास कितने प्राकृतिक संसाधन हैं और वह उनका उपयोग कैसे करता है।
- असली ताकत: भारत की असली ताकत उसके बायो-रिसोर्सेज (जैव संसाधनों) में निहित है।
- जीवन का आधार: मंत्री ने स्पष्ट किया कि भले ही भारत ने डेटा, सॉफ्टवेयर और मैन्युफैक्चरिंग में बड़ी तरक्की की हो, लेकिन जीवन की चार बुनियादी ज़रूरतें— भोजन, दवा, ऊर्जा और तेल — अंततः प्रकृति से ही प्राप्त होती हैं।
सस्टेनेबल इस्तेमाल और विकास
NIRANTAR का लक्ष्य केवल शोध तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि भारत के इन बेशकीमती संसाधनों का विकास के लिए सस्टेनेबल (सतत) इस्तेमाल हो सके। यह प्लेटफॉर्म वैज्ञानिक शोध के नतीजों को जमीनी स्तर पर लागू करने में एक सेतु का काम करेगा।


