NGT ने ग्रेट निकोबार मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना को मंजूरी दी

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने 16 फरवरी को ग्रेट निकोबार द्वीप पर ₹81,000 करोड़ की मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना को मंजूरी दे दी है। NGT ने परियोजना के “रणनीतिक महत्व” को स्वीकार किया और कहा कि इसके पर्यावरणीय मंजूरी में “पर्याप्त सुरक्षा उपाय” शामिल हैं।

इस महत्वपूर्ण और बहुचर्चित परियोजना का विस्तृत हिंदी अनुवाद और विवरण नीचे दिया गया है:

ग्रेट निकोबार परियोजना: चार मुख्य स्तंभ

यह परियोजना अंडमान और निकोबार द्वीप समूह एकीकृत विकास निगम लिमिटेड (ANIIDCO) द्वारा कार्यान्वित की जा रही है। इसके चार मुख्य हिस्से हैं:

  1. ट्रांसशिपमेंट पोर्ट: गलाथिया खाड़ी (Galathea Bay) में एक अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह।
  2. हवाई अड्डा: नागरिक और सैन्य उद्देश्यों के लिए एक संयुक्त हवाई अड्डा।
  3. एकीकृत टाउनशिप: इसमें रक्षा सुविधाएं और आवासीय क्षेत्र शामिल होंगे।
  4. बिजली संयंत्र: 450-MVA क्षमता का गैस और सौर ऊर्जा आधारित प्लांट।

रणनीतिक और आर्थिक महत्व

ग्रेट निकोबार द्वीप मलक्का जलडमरूमध्य (Malacca Strait) के पास भारत का सबसे नजदीकी क्षेत्र है, जो हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाला एक प्रमुख ‘चोक पॉइंट’ है।

  • व्यापार: इस मार्ग से सालाना 94,000 जहाज गुजरते हैं, जो वैश्विक व्यापारिक वस्तुओं का 30% और दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का एक-तिहाई हिस्सा है।
  • प्रतिस्पर्धा: गलाथिया खाड़ी का यह बंदरगाह कोलंबो, हंबनटोटा (श्रीलंका), पोर्ट क्लांग (मलेशिया) और सिंगापुर के बंदरगाहों को कड़ी टक्कर देगा।

पर्यावरणीय और सामाजिक चिंताएँ

NGT की मंजूरी के बावजूद, विशेषज्ञों ने इस परियोजना के संभावित प्रभावों पर चिंता जताई है:

  • जैव विविधता: ग्रेट निकोबार द्वीप ‘सुंदालैंड’ (Sundaland) जैव विविधता हॉटस्पॉट का हिस्सा है। यहाँ का ग्रेट निकोबार बायोस्फीयर रिजर्व पारिस्थितिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है।
  • वन्यजीव: * लेदरबैक कछुए: गलाथिया खाड़ी इन दुर्लभ कछुओं का प्रमुख प्रजनन स्थल है।
    • निकोबार मेगापोड: यह केवल यहीं पाया जाने वाला जमीन पर रहने वाला पक्षी है, जिसके घोंसले परियोजना क्षेत्र से प्रभावित होंगे।
  • स्वदेशी समुदाय: यह परियोजना शोंपेन (Shompen) और निकोबारी समुदायों के लिए आरक्षित वन क्षेत्रों और उनके पारंपरिक निवासों को प्रभावित करेगी।

वर्तमान स्थिति और सुरक्षा उपाय

सरकार का तर्क है कि परियोजना आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपरिहार्य है। पर्यावरण मंजूरी के हिस्से के रूप में, प्रभावित होने वाले वनों की क्षतिपूर्ति के लिए अन्य स्थानों पर वृक्षारोपण और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए विशेष फंड का प्रावधान किया गया है।

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