महाराष्ट्र सरकार ने “धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026” पेश किया
महाराष्ट्र सरकार ने 13 मार्च को विधानसभा में “धर्म स्वातंत्र्य विधेयक (Freedom of Religion Bill), 2026” पेश किया। यह विधेयक धर्मांतरण को विनियमित करने और अवैध धर्मांतरण के मामलों में दंडात्मक कार्रवाई करने के उद्देश्य से लाया गया है।
अवैध धर्मांतरण की परिभाषा
विधेयक के अनुसार, यदि धर्मांतरण निम्नलिखित माध्यमों से किया जाता है, तो उसे अवैध माना जाएगा:
- लालच (Allurement), जबरदस्ती (Coercion), या बल प्रयोग।
- धोखाधड़ी, गलत बयानी (Misrepresentation), या धमकी।
- अनुचित प्रभाव (Undue influence) या ब्रेनवाश करना (शिक्षा के माध्यम से भी)।
- सामूहिक धर्मांतरण: एक ही समय में दो या दो से अधिक व्यक्तियों का जबरन धर्मांतरण।
“लालच” (Allurement) का विस्तृत दायरा
विधेयक में ‘लालच’ शब्द को बहुत व्यापक रूप से परिभाषित किया गया है, जिसमें शामिल हैं:
- उपहार, नकद या वस्तु के रूप में भौतिक लाभ, या आसान पैसा।
- रोजगार या धार्मिक संस्थानों द्वारा संचालित मुफ्त शिक्षा का वादा।
- शादी का वादा, बेहतर जीवनशैली या “दिव्य उपचार” (Divine healing) का दावा।
- नया प्रावधान: एक धर्म का दूसरे पर महिमामंडन करना या किसी धर्म की रीतियों को दूसरे की तुलना में हानिकारक दिखाना भी अब लालच की श्रेणी में आएगा।
विवाह और बच्चों से संबंधित प्रावधान
- विवाह की वैधता: यदि कोई विवाह केवल अवैध धर्मांतरण के उद्देश्य से किया गया है, तो अदालत उसे अमान्य (Null and Void) घोषित कर सकती है।
- बच्चों का धर्म: अमान्य विवाह से पैदा हुआ बच्चा अपनी माँ के उस धर्म का माना जाएगा जो उसने विवाह से पहले अपनाया था।
- भरण-पोषण और कस्टडी: बच्चा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 144 के तहत भरण-पोषण का हकदार होगा। बच्चे की कस्टडी माँ के पास रहेगी, जब तक कि अदालत अन्यथा आदेश न दे।
दंड और जुर्माना (Penalties)
| अपराध की श्रेणी | कारावास | जुर्माना |
| सामान्य अवैध धर्मांतरण | 7 वर्ष | ₹1 लाख |
| नाबालिग, महिला, SC/ST या मानसिक अस्वस्थ व्यक्ति का धर्मांतरण | 7 वर्ष | ₹5 लाख |
| सामूहिक धर्मांतरण (Mass Conversion) | 7 वर्ष | ₹5 लाख |
Source: IE


