लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (LR-AShM)
कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड के दौरान DRDO ने अपनी अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया, जिसमें लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (LR-AShM) और ‘नौसेना लड़ाकू पनडुब्बियों के लिए तकनीक’ थीम पर आधारित झांकी मुख्य आकर्षण रहे।
लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (LR-AShM)
LR-AShM और उसके लॉन्चर का प्रदर्शन भारत के हाइपरसोनिक हथियार कार्यक्रम में एक मील का पत्थर है। इसे भारतीय नौसेना की तटीय सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने और समुद्री हमलावर क्षमताओं को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
मिसाइल की मुख्य विशेषताएं:
- हाइपरसोनिक गति: यह मिसाइल मैक 10 (Mach 10) की प्रारंभिक गति प्राप्त करती है और अपनी उड़ान के दौरान औसत मैक 5.0 की गति बनाए रखती है।
- क्वासी-बैलिस्टिक प्रक्षेपवक्र (Quasi-ballistic trajectory): यह मिसाइल उड़ान के दौरान कई बार ‘स्किप’ (उछलते हुए) करती है, जिससे इसकी दिशा का अनुमान लगाना कठिन हो जाता है।
- स्टील्थ क्षमता: अपने कम ऊंचाई वाले उड़ान प्रोफाइल, उच्च गति और दांव-पेच (manoeuvrability) के कारण, दुश्मन के रडार इसे ट्रैक करने में विफल रहते हैं।
- स्वदेशी तकनीक: इसमें पूरी तरह से स्वदेशी एवियोनिक्स और उच्च-सटीक सेंसर पैकेज शामिल हैं, जो चलते हुए जहाजों को भी सटीक निशाना बनाने में सक्षम हैं।
कार्यप्रणाली (Operation):
- दो-चरणीय प्रणोदन (Two-stage propulsion): इसमें दो चरणों वाला ठोस प्रणोदन रॉकेट मोटर सिस्टम है। पहला चरण मिसाइल को आवश्यक हाइपरसोनिक वेग तक त्वरित करता है।
- प्रथक्करण: पहले चरण के समाप्त होने के बाद, दूसरा चरण मिसाइल को और आगे बढ़ाता है।
- अनपावर्ड ग्लाइड (Unpowered Glide): दूसरे चरण के जलने के बाद, मिसाइल बिना इंजन शक्ति के वायुमंडलीय युद्धाभ्यास करते हुए लक्ष्य पर प्रहार करती है।
DRDO की झांकी: लड़ाकू पनडुब्बियों के लिए नौसैनिक तकनीक
DRDO की झांकी ने पनडुब्बियों के लिए स्वदेशी रूप से विकसित तकनीकों पर ध्यान केंद्रित किया, जो भारत की पानी के भीतर युद्ध करने की क्षमता (Underwater Warfare) को नई ऊंचाइयों पर ले जाती हैं।


