यूनेस्को विश्व धरोहर की दौड़ में मेघालय के ‘लिविंग रूट ब्रिज’

भारत ने आधिकारिक तौर पर मेघालय के अद्वितीय जीवित जड़ पुलों (Living Root Bridges) का नामांकन डोजियर यूनेस्को को सौंप दिया है। इसे “जिंगकिएंग जरी / ल्यू छराय सांस्कृतिक परिदृश्य” (Jingkieng Jri / Lyu Chrai Cultural Landscape) शीर्षक के तहत 2026-27 के मूल्यांकन चक्र के लिए नामांकित किया गया है।

मुख्य विवरण:

  • प्रस्तुतिकरण: यह डोजियर यूनेस्को में भारत के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि, विशाल वी. शर्मा द्वारा यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र के निदेशक, लाज़ारे असोमो एलौंडौ को सौंपा गया।
  • क्षेत्र: यह नामांकित सांस्कृतिक परिदृश्य खासी और जयंतिया पहाड़ियों में फैला हुआ है।
  • स्वदेशी परंपरा: यह सदियों से खासी और जयंतिया समुदायों द्वारा विकसित और संरक्षित एक जीवित परंपरा को प्रदर्शित करता है।

लिविंग रूट ब्रिज (Jingkieng Jri) की विशेषताएं:

  1. प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व: ये पुल स्वदेशी दर्शन और ‘मेई रामेव’ (धरती माता) के प्रति सम्मान का प्रतीक हैं।
  2. जैविक आधार: ये पुल मुख्य रूप से फाइकस (Ficus) प्रजाति, विशेष रूप से ‘इंडिया रबर ट्री’ की जड़ों पर आधारित ग्रामीण संपर्क और आजीविका समाधान हैं।
  3. विविध संरचनाएं: हाल के अध्ययनों से पता चला है कि ये केवल पुल ही नहीं हैं, बल्कि इनमें सीढ़ियां (ladders), प्लेटफॉर्म, टावर और भूस्खलन रोकने वाली संरचनाएं भी शामिल हैं।
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