सशस्त्र संघर्ष का कानून (LOAC)

चूंकि ईरान और अमेरिका दोनों एक अंतर्राष्ट्रीय सशस्त्र संघर्ष में शामिल हैं, इसलिए उनका आचरण सशस्त्र संघर्ष के कानून (Law of Armed Conflict: LOAC) द्वारा विनियमित होगा, जिसे अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून (International Humanitarian Law) के रूप में भी जाना जाता है। 

सशस्त्र संघर्ष का कानून (LOAC) और उसका दायरा

LOAC सशस्त्र संघर्ष के दौरान की जाने वाली कार्रवाइयों/आचरणों (jus in bello) को नियंत्रित करता है, लेकिन यह सशस्त्र बल के उपयोग के अधिकार या युद्ध के कारण (jus ad bellum) को विनियमित नहीं करता है, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर (UN Charter) में निहित है।

तटस्थ देशों के क्षेत्रों में समुद्री युद्ध के नियम

  • प्रतिबंधित क्षेत्र: LOAC तटस्थ देशों (neutral States) के आंतरिक जल, प्रादेशिक समुद्र और जहां लागू हो, वहां उनके द्वीपसमूह जल (archipelagic waters) के भीतर युद्धरत सेनाओं द्वारा शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों को रोकता है।
  • अनुमति प्राप्त क्षेत्र: यह स्पष्ट रूप से उन क्षेत्रों में सैन्य संचालन की अनुमति देता है जहाँ तटस्थ देशों को सामान्य अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत संप्रभु अधिकार या अधिकार क्षेत्र प्राप्त हैं (जैसे EEZ), बशर्ते कि युद्धरत पक्ष उन तटस्थ राज्यों के वैध अधिकारों का उचित सम्मान (due regard) करें।

IRIS डेना हमले की कानूनी स्थिति

  • श्रीलंका की स्थिति: ‘डेना’ पर हमले के दौरान, श्रीलंका के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में उसके अधिकारों के उल्लंघन की कोई रिपोर्ट नहीं मिली।
  • निष्कर्ष: चूंकि यह हमला तटस्थ देश (श्रीलंका) के प्रादेशिक समुद्र (12 समुद्री मील) के बाहर हुआ था, इसलिए अमेरिकी नौसेना कानूनी रूप से उस स्थान पर सैन्य कार्रवाई करने के लिए उचित थी।

नौसैनिक युद्ध का कानून (Law of Naval Warfare)

नौसैनिक युद्ध का कानून युद्धरत पक्षों को हर उस समुद्री क्षेत्र में सैन्य संचालन करने की अनुमति देता है जो किसी तटस्थ राज्य का प्रादेशिक समुद्र, आंतरिक जल या द्वीपसमूह जल नहीं है।

Source: IE

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