भारत में लिगो (LIGO-India) वेधशाला का निर्माण
लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने 24 फरवरी को घोषणा की कि उसके दो व्यावसायिक कार्यक्षेत्रों—हैवी सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर और हैवी इंजीनियरिंग—ने केंद्र सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग से LIGO-India वेधशाला स्थापित करने के लिए एक ‘महत्वपूर्ण’ ऑर्डर प्राप्त किया है।
मुख्य विवरण:
- स्थान: यह वेधशाला महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के औंधा (Aundha) में स्थापित की जाएगी।
- सहयोग: यह परियोजना भारतीय अनुसंधान संस्थानों के एक संघ और अमेरिका की LIGO प्रयोगशाला के बीच एक सहयोगात्मक प्रयास है।
- इतिहास: भारत सरकार ने फरवरी 2016 में LIGO-India को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी।
गुरुत्वाकर्षण तरंगें (Gravitational Waves) क्या हैं?
अल्बर्ट आइंस्टीन ने 1916 में अपने ‘सामान्य सापेक्षता सिद्धांत’ (General Theory of Relativity) में गुरुत्वाकर्षण तरंगों की भविष्यवाणी की थी।
- परिभाषा: ये अंतरिक्ष-समय (space-time) में आने वाली ‘लहरें’ या ‘रिपल्स’ हैं, जो ब्रह्मांड की सबसे विस्फोटक और ऊर्जावान प्रक्रियाओं के कारण उत्पन्न होती हैं।
- गुण:
- ये अदृश्य होती हैं लेकिन प्रकाश की गति ($3 \times 10^8$ मीटर/सेकंड) से यात्रा करती हैं।
- अपने मार्ग में आने वाली किसी भी चीज़ को ये सिकोड़ती और खींचती (squeeze and stretch) हैं।
- ये विद्युत चुंबकीय विकिरण (जैसे प्रकाश या रेडियो तरंगें) का हिस्सा नहीं हैं।
यह कैसे काम करता है?
पारंपरिक टेलीस्कोप के विपरीत, LIGO विद्युत चुंबकीय विकिरण को नहीं देखता। इसके डिटेक्टर बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग और सुरक्षित रखे जाते हैं ताकि वे केवल गुरुत्वाकर्षण तरंगों को पकड़ सकें।
तरंगों के स्रोत:
- ब्लैक होल का आपस में टकराना और विलीन होना।
- दो विशाल तारों का एक-दूसरे की परिक्रमा करना।
- सुपरनोवा (तारे का विस्फोट)।
ऐतिहासिक उपलब्धि: 14 सितंबर, 2015 को LIGO ने पहली बार गुरुत्वाकर्षण तरंगों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया था (जिसे GW150914 नाम दिया गया), जिसने भौतिकी की दुनिया को बदल दिया।


