भूमि-उपयोग में बदलाव से हिमालय में मकड़ियों की क्रियाशील विविधता पर प्रभाव
शोधकर्ताओं ने पाया है कि उत्तर-पश्चिमी भारतीय हिमालय में भूमि-उपयोग में बदलाव (जैसे शहरीकरण या कृषि) और समुद्र तल से ऊंचाई (Elevation) मिलकर मकड़ियों के क्रियाशील गुणों (Functional properties) को प्रभावित कर रहे हैं। इससे इन आर्थ्रोपोड्स की सामुदायिक लचीलापन (Resilience) और उनकी पारिस्थितिक भूमिकाओं पर असर पड़ रहा है।
क्रियाशील विविधता (Functional Diversity) क्या है?
अध्ययन में ‘वर्गीकरण विविधता’ (Taxonomic Diversity) के बजाय ‘कार्यात्मक विविधता’ पर जोर दिया गया है:
- वर्गीकरण विविधता: यह केवल प्रजातियों की संख्या (कितनी प्रजातियाँ हैं) को गिनती है।
- कार्यात्मक विविधता: यह इस बात पर ध्यान केंद्रित करती है कि कोई प्रजाति पारिस्थितिकी तंत्र में क्या भूमिका निभाती है और उसके शारीरिक (आकारिकी) या व्यावहारिक लक्षण उसे यह भूमिका निभाने में कैसे मदद करते हैं।
उदाहरण के लिए: एक जंगल में अलग-अलग पक्षी हो सकते हैं। कोई कठोर बीजों को तोड़ता है, कोई पेड़ों की छाल से कीड़े खाता है, तो कोई फलों के बीजों को दूर-दूर तक फैलाता है। ये सभी अलग-अलग कार्य मिलकर ‘कार्यात्मक विविधता’ बनाते हैं।
पारिस्थितिक महत्व और स्थिरता
वैज्ञानिकों के अनुसार, क्रियाशील विविधता पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि:
- पारिस्थितिकी तंत्र की गतिशीलता: यह उत्पादकता, पोषक तत्वों के संतुलन और स्थिरता को प्रभावित करती है।
- स्थिरता और क्षतिपूर्ति: उच्च कार्यात्मक विविधता पारिस्थितिकी तंत्र को अधिक स्थिर बनाती है। यदि एक प्रजाति स्थानीय रूप से विलुप्त हो जाती है, तो वैसी ही भूमिका निभाने वाली दूसरी प्रजाति उसकी कमी को पूरा कर सकती है।
मकड़ियों की महत्वपूर्ण भूमिकाएँ
खाद्य श्रृंखला (Food Web) की महत्वपूर्ण कड़ी: मकड़ियां शिकारी (Predators) और शिकार (Prey) दोनों की भूमिका निभाती हैं। वे कीटों की आबादी को नियंत्रित करती हैं और साथ ही पक्षियों, छिपकलियों और अन्य छोटे स्तनधारियों के लिए भोजन का मुख्य स्रोत भी होती हैं।
रोगों के प्रसार पर नियंत्रण: मकड़ियां भारी मात्रा में रोगवाहकों (Vectors), जैसे मच्छर और मक्खियों का उपभोग करती हैं। ऐसा करके वे मलेरिया, डेंगू और अन्य संक्रामक रोगों के प्रसार को रोकने में मदद करती हैं।
परागण में योगदान (Pollination): यद्यपि मधुमक्खियों या भृंगों (Beetles) की तुलना में इनका योगदान कम है, लेकिन मकड़ियों की कुछ प्रजातियां फूलों पर आने वाले कीटों का शिकार करते समय पराग कणों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने में मदद करती हैं।
जैव-संकेतक (Bioindicators) के रूप में कार्य: मकड़ियां अपने सूक्ष्म-पर्यावासों (Microhabitats) में होने वाले बदलावों के प्रति अत्यंत संवेदनशील होती हैं।
- जैव-संकेतक: इनकी उपस्थिति या अनुपस्थिति से किसी क्षेत्र के पारिस्थितिक स्वास्थ्य का पता लगाया जा सकता है।
सिनैंथ्रोपिक प्रजातियां (Synanthropic Species): कुछ मकड़ियां (जैसे घर में पाई जाने वाली मकड़ियां) मनुष्यों के साथ रहने के लिए अनुकूलित होती हैं। इनकी संख्या में बदलाव मानवीय हस्तक्षेप के स्तर को दर्शा सकता है।
Source: DTE


