PSLV-C62 मिशन की विफलता
12 जनवरी 2026 को EOS-N1 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट और 15 अन्य छोटे उपग्रहों को लेकर रवाना हुआ PSLV-C62 मिशन सफल नहीं हो सका। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च होने के बाद, रॉकेट के तीसरे चरण (Third Stage) के अंत में आई तकनीकी खराबी के कारण उपग्रह अपनी निर्धारित कक्षा तक नहीं पहुँच पाए।
PSLV की चार चरणों वाली संरचना (The Four Stages of PSLV)
PSLV एक बहुमुखी रॉकेट है, जो ठोस (Solid) और तरल (Liquid) ईंधनों के वैकल्पिक उपयोग के लिए जाना जाता है:
- प्रथम चरण (PS1): इसमें ठोस प्रणोदक (Solid Propellant) का उपयोग होता है। यह रॉकेट का सबसे भारी हिस्सा होता है जो शुरुआती लिफ्ट-ऑफ के लिए भारी शक्ति प्रदान करता है।
- द्वितीय चरण (PS2): इसमें भारत में निर्मित प्रसिद्ध विकास इंजन (Vikas Engine) और तरल ईंधन का उपयोग किया जाता है।
- तृतीय चरण (PS3): यह एक ठोस इंजन चरण है। यहाँ रॉकेट लगभग क्षैतिज (Horizontal) दिशा में चलता है और गति (Velocity) बढ़ाने का काम करता है।
- चतुर्थ चरण (PS4): अंतिम चरण में फिर से तरल प्रणोदन (Liquid Propulsion) का उपयोग होता है, जो उपग्रहों को उनकी सटीक कक्षा में स्थापित करता है।
विफलता के संभावित कारण
वैज्ञानिकों के अनुसार, तीसरे चरण के दौरान आई गड़बड़ी मिशन के लिए घातक साबित हुई:
- वेग की कमी (Lack of Velocity): यदि कम्बशन चैंबर में दबाव (Pressure) कम हो जाता है, तो रॉकेट अपेक्षित गति प्राप्त नहीं कर पाता। कक्षा बनाए रखने के लिए एक निश्चित गति अनिवार्य है; इसके बिना रॉकेट गुरुत्वाकर्षण के कारण वापस गिर जाता है।
- इतिहास: यह लगातार दूसरी विफलता है (पिछली बार PSLV-C61 भी विफल रहा था)। पिछले साल की विफलता का मुख्य कारण इंजन के कम्बशन चैंबर में अप्रत्याशित गिरावट थी।


