ऑपरेशन ‘रोअरिंग लायन’ और ‘एपिक फ्यूरी’

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत विफल होने के बाद 28 फरवरी, 2026 को इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया। इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस सैन्य अभियान को ‘रोअरिंग लायन’ (Roaring Lion) नाम दिया है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस ऑपरेशन को ‘एपिक फ्यूरी’ (Epic Fury) नाम दिया है।

ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ और ऑपरेशन ‘रोअरिंग लायन’ के तहत किए गए ये हमले जून 2025 के ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ से काफी अलग हैं, जिसमें केवल प्रमुख परमाणु लक्ष्यों पर सीमित हमले किए गए थे। इसके विपरीत, 28 फरवरी के हमलों में नेतृत्व (leadership), सैन्य प्रतिष्ठानों, मिसाइल उत्पादन स्थलों और ईरान के परमाणु कार्यक्रम के अवशेषों को निशाना बनाया गया।

ये हमले एक लंबे संघर्ष की शुरुआती कड़ी प्रतीत होते हैं, जिसका उद्देश्य ईरानी सरकार का व्यवस्थित पतन करना है। ईरानी सरकारी मीडिया ने बाद में खामेनेई की मृत्यु की पुष्टि की। यह हमला तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका-ईरान वार्ता के बिना किसी समझौते के समाप्त होने के दो दिन बाद हुआ। ईरान ने इस हमले को “अकारण और अवैध” बताते हुए पूरे मध्य पूर्व में जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं।

हमले के कारण:

  • परमाणु हथियार: ट्रंप ने बार-बार कहा है कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं हो सकते। जून 2025 की बमबारी के लिए अमेरिका और इज़राइल ने तर्क दिया था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के बहुत करीब पहुंच गया था।
  • हिंसा का आरोप: ट्रंप ने तेहरान पर “संयुक्त राज्य अमेरिका को निशाना बनाने वाले रक्तपात और सामूहिक हत्या के अंतहीन अभियान” चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने ईरानी जनता से मौलवी शासन (clerical establishment) को उखाड़ फेंकने के लिए तैयार रहने का आग्रह किया।
  • मिसाइल कार्यक्रम: एक अन्य कारण यह दिया गया है कि ईरान लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित कर रहा है जो अब यूरोप में अमेरिका के करीबी सहयोगियों के लिए खतरा बन सकती हैं।
  • ऐतिहासिक घटनाएँ: ट्रंप ने 1979 में तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर हिंसक कब्जे (जिसमें दर्जनों अमेरिकियों को 444 दिनों तक बंधक बनाया गया था) और 1983 में बेरूत में अमेरिकी मरीन बैरक पर ईरान के प्रतिनिधियों द्वारा किए गए बम विस्फोट (जिसमें 241 लोग मारे गए थे) का भी हवाला दिया।
  • आंतरिक अशांति: अमेरिकी राष्ट्रपति ने जनवरी में यह वादा भी किया था कि यदि ईरानी सुरक्षा बल आर्थिक संकट के बीच हो रहे विरोध प्रदर्शनों को कुचलते हैं, तो वे हस्तक्षेप करेंगे।

Sources: DD, BBC

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