ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई, जो 1989 से सत्ता में थे, 86 वर्ष की आयु में अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों में मारे गए हैं। उनका जन्म 1939 में उत्तर-पूर्वी ईरान के पवित्र शहर मशहद में हुआ था।
खामेनेई के जीवन और शासन के मुख्य पड़ाव:
- क्रांति और स्थापना: उन्होंने उस ईरानी क्रांति का नेतृत्व किया जिसने पहलवी वंश को उखाड़ फेंका और 1979 में इस्लामी गणराज्य की स्थापना की।
- 1981 का हमला: जून 1981 में, तेहरान की अबुजर मस्जिद में एक टेप रिकॉर्डर बम विस्फोट में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस हमले में उनका दाहिना हाथ लकवाग्रस्त हो गया और उन्होंने एक कान से सुनने की क्षमता खो दी थी।
- सत्ता का सफर: 1981 में वे ईरान के राष्ट्रपति बने और 1989 में अयातुल्ला खुमैनी के निधन के बाद सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) के रूप में उनके उत्तराधिकारी बने।
- क्षेत्रीय प्रभाव और ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’: खामेनेई ने ईरान को एक क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित किया और अमेरिका व इजरायल के कट्टर विरोधी के रूप में उभरे। उन्होंने पूरे क्षेत्र में ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ (लेबनान में हिजबुल्लाह, यमन में हूतियों और फिलिस्तीन में हमास जैसे समूहों का नेटवर्क) तैयार किया।
- सैन्य और तकनीकी विकास: उनके शासनकाल में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के माध्यम से ईरान की सैन्य शक्ति और स्वदेशी मिसाइल तकनीक में अभूतपूर्व वृद्धि हुई।
ईरान का ‘सर्वोच्च नेता’ (Supreme Leader): पद और शक्ति
ईरान की व्यवस्था में सर्वोच्च नेता (रबर) न केवल धार्मिक प्रमुख है, बल्कि वह देश का वास्तविक राष्ट्राध्यक्ष (De facto Head of State) भी होता है। इसकी शक्तियां राष्ट्रपति से कहीं अधिक होती हैं।
- स्थापना: इस पद की स्थापना 1979 के ईरानी संविधान द्वारा की गई थी। यह अयातुल्ला रुहोल्ला खुमैनी के ‘विलायत-ए-फकीह’ (इस्लामी न्यायविद का संरक्षण) के सिद्धांत पर आधारित है।
- कार्यकाल: यह एक आजीवन नियुक्ति है।
- चयन प्रक्रिया: सर्वोच्च नेता का चयन ‘विशेषज्ञों की परिषद’ (Assembly of Experts) द्वारा किया जाता है, जो स्वयं निर्वाचित सदस्यों का एक निकाय है।
- त्रिकोणीय व्यवस्था: ईरान की राजनीतिक प्रणाली सर्वोच्च नेता, जनता द्वारा चुने गए राष्ट्रपति और मजलिस (संसद) के मेल से चलती है, लेकिन अंतिम निर्णय सर्वोच्च नेता का ही होता है।
- अयातुल्ला अली खामेनेई ईरान के दूसरे सर्वोच्च नेता थे। उन्होंने 4 जून 1989 को कार्यभार संभाला था और 28 फरवरी 2026 को अपने निधन तक इस पद पर रहे। उनके लंबे शासनकाल ने आधुनिक ईरान की विदेश नीति और सैन्य रणनीति को आकार दिया।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) 1979 में स्थापित यह एक विशिष्ट सैन्य शाखा है, जो सामान्य सेना से अलग है। IRGC नागरिक सरकार या राष्ट्रपति के प्रति नहीं, बल्कि केवल सर्वोच्च नेता के कार्यालय के प्रति जवाबदेह होती है। यह सेना ईरान की आंतरिक सुरक्षा, विदेशी ऑपरेशनों और अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखती है, जिससे सर्वोच्च नेता की सत्ता और भी मजबूत हो जाती है।


