कोलंबिया अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का 33 वां सदस्य बना
पेरिस में आयोजित हालिया मंत्रिस्तरीय बैठक में, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने पूर्ण सदस्यता के लिए भारत के अनुरोध पर हुई प्रगति का स्वागत किया है। वर्तमान में, भारत इस संस्था का एक ‘सहयोगी सदस्य’ (Associate Member) है।
1. सदस्यता की प्रमुख कानूनी बाधा
IEA की सदस्यता प्राप्त करना भारत के लिए सीधा रास्ता नहीं है क्योंकि:
- OECD की शर्त: IEA का संस्थापक ढांचा केवल आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के सदस्य देशों को ही पूर्ण सदस्यता की अनुमति देता है।
- संशोधन की आवश्यकता: भारत की सदस्यता के लिए IEA को अपने संस्थापक कानूनी ढांचे में संशोधन करना होगा, क्योंकि भारत OECD का सदस्य नहीं है।
2. IEA का इतिहास और उद्देश्य
- स्थापना: 1974 में, ‘योम किप्पुर युद्ध’ के बाद अरब देशों द्वारा लगाए गए तेल प्रतिबंध (Oil Embargo) और वैश्विक तेल संकट के जवाब में।
- मूल उद्देश्य: तेल आपूर्ति को स्थिर रखना और भविष्य में आपूर्ति में होने वाले व्यवधानों को रोकना।
- मौजूदा स्थिति: अब यह ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) पर भी ध्यान केंद्रित करता है।
- सदस्य संख्या: वर्तमान में 32 पूर्ण सदस्य हैं। हाल ही में कोलंबिया को 33वें सदस्य के रूप में शामिल करने की घोषणा हुई (क्योंकि वह 2020 में OECD का सदस्य बन गया था)।
पूर्ण सदस्यता के लिए अनिवार्य शर्तें
IEA का पूर्ण सदस्य बनने के लिए किसी भी देश को निम्नलिखित कड़े मानदंडों को पूरा करना होता है:
| शर्त | विवरण |
| OECD सदस्यता | देश को अनिवार्य रूप से OECD का सदस्य होना चाहिए (भारत के मामले में यह सबसे बड़ी बाधा है)। |
| रणनीतिक तेल भंडार | पिछले वर्ष के शुद्ध आयात के कम से कम 90 दिनों के बराबर कच्चे तेल या उत्पादों का स्टॉक बनाए रखना। |
| मांग नियंत्रण कार्यक्रम | राष्ट्रीय स्तर पर तेल की खपत में 10% तक की कमी लाने के कार्यक्रम स्थापित करना। |
| कानूनी क्षमता | ‘समन्वित आपातकालीन प्रतिक्रिया उपाय’ (CERM) संचालित करने की कानूनी शक्ति। |
भारत और IEA का संबंध
- 2015: IEA ने गैर-OECD देशों के लिए ‘सहयोगी सदस्यता’ के दरवाजे खोले।
- 2017: भारत एक सहयोगी सदस्य बना।
- अक्टूबर 2023: भारत ने औपचारिक रूप से पूर्ण सदस्यता के लिए आवेदन किया।
भारत के लिए इसका महत्व क्यों है?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है। IEA की पूर्ण सदस्यता से भारत को वैश्विक ऊर्जा नीतियों के निर्धारण में निर्णायक भूमिका (Decision-making rights) मिलेगी और ऊर्जा संकट के समय रणनीतिक सुरक्षा प्राप्त होगी।
Source: IEA


