मिशन सागर मैत्री-5
भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में अपनी वैज्ञानिक कूटनीति और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। 17 जनवरी 2026 को, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के समुद्र विज्ञान अनुसंधान पोत आईएनएस सागरध्वनि (INS Sagardhwani) को कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान से ‘सागर मैत्री’ (SAGAR MAITRI) पहल के पांचवें संस्करण के लिए रवाना किया गया।
सागर मैत्री और ‘महासागर’ विजन
यह पहल भारतीय नौसेना और DRDO का एक प्रमुख संयुक्त प्रयास है। यह भारत सरकार के MAHASAGAR (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी और समग्र उन्नति) विजन के अनुरूप है। इसका प्राथमिक उद्देश्य हिंद महासागर रिम देशों के बीच समुद्री अनुसंधान, सामाजिक-आर्थिक जुड़ाव और वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
मुख्य वैज्ञानिक घटक: MAITRI
इस मिशन के तहत, DRDO ने MAITRI (मरीन एंड एलाइड इंटरडिसिप्लिनरी ट्रेनिंग एंड रिसर्च इनिशिएटिव) नामक एक विशेष वैज्ञानिक घटक लॉन्च किया है। इसका लक्ष्य IOR देशों के साथ समुद्र अनुसंधान और विकास में दीर्घकालिक साझेदारी और क्षमता निर्माण करना है।
सहयोगी देश: इस मिशन के तहत आठ देशों के साथ स्थायी सहयोग स्थापित किया जाएगा:
- ओमान, मालदीव, श्रीलंका, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया और म्यांमार।
ऐतिहासिक संदर्भ और UDA का महत्व
- ऐतिहासिक मार्ग: आईएनएस सागरध्वनि इस मिशन के दौरान आईएनएस कृष्णा के उन ऐतिहासिक मार्गों का अनुसरण करेगा, जिसने 1962-1965 के ‘अंतर्राष्ट्रीय हिंद महासागर अभियान’ में भाग लिया था।
- रणनीतिक लाभ: सागर मैत्री पहल भारतीय नौसेना के लिए अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस (UDA) यानी पानी के नीचे की गतिविधियों की निगरानी और समझ को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मिशन सागर मैत्री: एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
| पोत का नाम | आईएनएस सागरध्वनि (INS Sagardhwani) |
| संचालन इकाई | नौसेना भौतिक और समुद्र विज्ञान प्रयोगशाला (NPOL) |
| मिशन का संस्करण | पांचवां (SAGAR MAITRI-5) |
| मुख्य उद्देश्य | वैज्ञानिक सहयोग और डेटा साझाकरण |
| रणनीतिक लक्ष्य | अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस (UDA) में सुधार |


