अंडमान में भारत के पहले ‘ओपन-सी मरीन फिश फार्मिंग’ प्रोजेक्ट का आगाज

भारत ने अपनी समुद्री सीमाओं की आर्थिक क्षमता को अनलॉक करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने अंडमान सागर के नॉर्थ बे (श्री विजया पुरम के पास) में देश के पहले ओपन-सी मरीन फिश फार्मिंग (Open-Sea Marine Fish Farming) पायलट प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया।

‘ब्लू इकोनॉमी’ के लिए मील का पत्थर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस पहल को भारत की ‘ब्लू इकोनॉमी’ (Blue Economy) यात्रा में एक बड़ा मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना देश के विशाल समुद्री संसाधनों के आर्थिक मूल्य को भुनाने का एक आधुनिक प्रयास है।

प्रमुख सहयोगी संस्थान:

  • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES)
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (NIOT)
  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह प्रशासन

परियोजना के मुख्य घटक और तकनीक

यह पायलट प्रोजेक्ट उन्नत समुद्री प्रौद्योगिकी और स्थानीय समुदायों की आजीविका को जोड़ने पर केंद्रित है। इसके दो मुख्य हस्तक्षेप (Interventions) हैं:

  1. समुद्री वनस्पति (Seaweed Farming): खुले समुद्र के गहरे पानी में समुद्री शैवाल की खेती को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय मछुआरों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज वितरित किए गए।
  2. समुद्री जीव (Finfish Culture): NIOT द्वारा विशेष रूप से डिजाइन किए गए ओपन-सी पिंजरों का उपयोग किया जा रहा है। ये पिंजरे प्राकृतिक समुद्री परिस्थितियों और लहरों का सामना करने में सक्षम हैं। इनमें व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण फिनफिश के बीज डाले गए हैं।

जैव विविधता संरक्षण पर जोर

अपनी यात्रा के दौरान, मंत्री ने 1983 में स्थापित महात्मा गांधी मरीन नेशनल पार्क (वांडूर) का भी दौरा किया।

  • विस्तार: यह पार्क 15 द्वीपों में फैला हुआ है।
  • पारिस्थितिकी: यह अपनी समृद्ध कोरल रीफ, मैंग्रोव जंगलों, कछुओं और दुर्लभ मछली प्रजातियों के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि मछली पालन की नई तकनीकों को अपनाते समय इन संवेदनशील समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा सर्वोपरि रहेगी।

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