भारत का डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात 1:811 हुआ
भारत में डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और यह अब प्रति 811 लोगों पर एक डॉक्टर हो गया है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रचलित मानक प्रति 1,000 लोगों पर एक डॉक्टर से बेहतर है। यह जानकारी केंद्र सरकार ने मंगलवार को संसद में दी।
राज्यसभा में लिखित उत्तर देते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि यह आंकड़ा हेल्थ डायनेमिक्स ऑफ इंडिया (इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड ह्यूमन रिसोर्सेज) 2022–23 की नवीनतम रिपोर्ट पर आधारित है, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रशासनिक आंकड़ों का उपयोग किया गया है। इस अनुमान में यह माना गया है कि पंजीकृत चिकित्सा कर्मियों में से 80 प्रतिशत सक्रिय रूप से सेवाएं दे रहे हैं।
सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार:
- देश में 13,88,185 पंजीकृत एलोपैथिक डॉक्टर हैं।
- 7,51,768 पंजीकृत आयुष चिकित्सक उपलब्ध हैं।
यदि इन पंजीकृत चिकित्सकों में से 80 प्रतिशत को सक्रिय माना जाए, तो देश का कुल डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात 1:811 बनता है, जो WHO के 1:1000 के मानक से बेहतर है।
मंत्री ने नर्सिंग स्टाफ की स्थिति पर भी जानकारी दी। भारतीय नर्सिंग परिषद के आंकड़ों के आधार पर, 80 प्रतिशत सक्रिय कार्यबल को ध्यान में रखते हुए, देश में प्रति 1,000 जनसंख्या पर 2.23 नर्सें उपलब्ध हैं।
संसद में दी गई यह जानकारी स्वास्थ्य क्षेत्र में मानव संसाधनों की उपलब्धता में सुधार को दर्शाती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इन संख्यात्मक उपलब्धियों को देश के सभी क्षेत्रों में समान रूप से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने में बदलना अभी भी एक चुनौती बना हुआ है।


