भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता
भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने 27 जनवरी को 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) के समापन की ऐतिहासिक घोषणा की है.
दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं, भारत (चौथी सबसे बड़ी) और यूरोपीय संघ (दूसरी सबसे बड़ी) ने एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते पर मुहर लगा दी है। वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 25% की हिस्सेदारी रखने वाले इन दोनों बाजारों का एकीकरण व्यापार और निवेश के अभूतपूर्व अवसर पैदा करेगा।
व्यापार और शुल्क (Tariffs) के मुख्य आंकड़े
- भारत के लिए लाभ: भारत को 97% टैरिफ लाइनों पर यूरोपीय बाजारों तक तरजीही पहुंच (Preferential Access) मिली है, जो व्यापार मूल्य का 99.5% कवर करती है।
- EU के लिए पेशकश: भारत अपनी 92.1% टैरिफ लाइनें पेश कर रहा है, जो EU के 97.5% निर्यात को कवर करती हैं।
- शून्य शुल्क: समझौते के लागू होते ही लगभग 33 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात पर 10% तक के शुल्क घटकर शून्य हो जाएंगे।
प्रमुख लाभार्थी क्षेत्र
यह समझौता भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों (Labour-intensive sectors) को निर्णायक बढ़ावा देगा:
- कपड़ा, परिधान और चमड़ा उद्योग।
- जूते (Footwear) और समुद्री उत्पाद।
- रत्न एवं आभूषण, हस्तशिल्प और इंजीनियरिंग सामान।
- ऑटोमोबाइल: एक विशेष कोटा-आधारित पैकेज के माध्यम से EU कार निर्माता भारत में उच्च मूल्य वाले मॉडल पेश कर सकेंगे, जिससे भविष्य में ‘मेक इन इंडिया’ और निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
सेवाएं और गतिशीलता (Services & Mobility)
- कुशल पेशेवर: एक व्यापक ‘मोबिलिटी फ्रेमवर्क’ के माध्यम से भारतीय पेशेवरों की यूरोपीय संघ में निर्बाध आवाजाही संभव होगी।
- सेवा क्षेत्र: भारत को EU के 144 उपक्षेत्रों (IT/ITeS, शिक्षा, पेशेवर सेवाएं) तक पहुंच मिलेगी, जबकि भारत ने EU के लिए 102 उपक्षेत्र खोले हैं।
गैर-टैरिफ बाधाओं का समाधान
समझौते में व्यापार की तकनीकी बाधाओं (TBT) और सेनेटरी और फाइटोसैनिटरी (SPS) प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए कड़े उपाय किए गए हैं, जिससे सीमा शुल्क प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आएगी।
व्यापार की वर्तमान स्थिति (2024–25)
| श्रेणी | कुल व्यापार (INR) | निर्यात (भारत से) | आयात (भारत में) |
| वस्तुएं (Goods) | 11.5 लाख करोड़ | 6.4 लाख करोड़ | 5.1 लाख करोड़ |
| सेवाएं (Services) | 7.2 लाख करोड़ | – |


