भारत में 100 से अधिक गाँव होंगे ‘सुनामी-रेडी’

भारत जल्द ही हिंद महासागर क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करने जा रहा है। भारत दुनिया का पहला ऐसा देश बनने की राह पर है, जहाँ 100 से अधिक तटीय गाँवों को यूनेस्को (UNESCO) द्वारा ‘सुनामी-तैयार’ (Tsunami-Ready) के रूप में मान्यता प्राप्त होगी। यह पहल तटीय समुदायों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।


क्या है यूनेस्को का ‘सुनामी-तैयार’ सर्टिफिकेशन?

यह यूनेस्को के इंटरगवर्नमेंटल ओशनोग्राफिक कमीशन (IOC) द्वारा दिया जाने वाला एक सामुदायिक-आधारित स्वैच्छिक प्रमाणन है। किसी गाँव को ‘सुनामी-रेडी’ घोषित करने के लिए कई कड़े मानकों को पूरा करना होता है:

  • निकासी नक्शे: सार्वजनिक स्थानों पर स्पष्ट सुनामी निकासी नक्शे और साइनबोर्ड लगाना।
  • 24/7 चेतावनी प्रणाली: सुनामी की चेतावनी प्राप्त करने और प्रसारित करने के लिए चौबीसों घंटे सक्रिय रहने वाला सिस्टम।
  • जागरूकता और अभ्यास: नियमित अंतराल पर मॉक ड्रिल का आयोजन और समुदाय में उच्च स्तर की जागरूकता।
  • मैपिंग: जोखिम वाले क्षेत्रों की वैज्ञानिक मैपिंग और तैयारी।

ओडिशा और अन्य राज्यों की अग्रणी भूमिका

भारत के कई तटीय राज्य इस मिशन में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं:

  • ओडिशा: वर्तमान में 6 जिलों के 24 गाँव पहले से ही प्रमाणित हैं। राज्य अब इस सूची में 72 और गाँव जोड़ने की तैयारी कर रहा है।
  • केरल: मार्च या अप्रैल 2026 तक केरल ने 9 तटीय गाँवों को इस पहल के लिए प्रस्तावित किया है।
  • अन्य क्षेत्र: गुजरात, आंध्र प्रदेश और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह ने भी अपने गाँवों की पहचान की है जिन्हें ‘सुनामी-रेडी’ बनाया जाएगा।

INCOIS: सुरक्षा चक्र का तकनीकी आधार

इस पूरी पहल का समन्वय INCOIS (इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज) द्वारा किया जा रहा है।

  • ITEWC: INCOIS हैदराबाद में ‘इंडियन सुनामी अर्ली वार्निंग सेंटर’ (ITEWC) संचालित करता है, जो दुनिया भर के भूकंपों पर नज़र रखता है।
  • चेतावनी प्रणाली: यह केंद्र हिंद महासागर क्षेत्र के लिए सटीक सुनामी चेतावनी जारी करता है।
  • पायलट प्रोजेक्ट: संस्थान ने सभी तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस कार्यक्रम का विस्तार करने के लिए पायलट गतिविधियों की शुरुआत कर दी है।
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