भारत ब्रह्मपुत्र नदी पर देश का पहला अंतर्देशीय जलमार्ग लाइटहाउस बनाएगा
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुरुवार को ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे चार नदीय प्रकाश स्तंभों (riverine lighthouses) की आधारशिला रखी। यह देश में पहली बार है जब किसी अंतर्देशीय जलमार्ग पर प्रकाश स्तंभ बुनियादी ढांचा स्थापित किया जाएगा।
आधारशिला समारोह लाछित घाट पर आयोजित किया गया था, जिसका आयोजन पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के तहत प्रकाश स्तंभ और प्रकाश पोत महानिदेशालय (DGLL) और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।
ये चार प्रकाश स्तंभ ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बोगीबील, पांडु, सिलघाट और बिस्वनाथ घाट पर बनाए जाएंगे, जो राष्ट्रीय जलमार्ग-2 (National Waterway 2) का हिस्सा है।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं:
- कुल निवेश: लगभग ₹84 करोड़।
- ऊंचाई: प्रत्येक प्रकाश स्तंभ लगभग 20 मीटर ऊंचा होगा।
- क्षमता: इनकी भौगोलिक सीमा 14 समुद्री मील और प्रकाश सीमा 8-10 समुद्री मील होगी।
- तकनीक: ये संरचनाएं पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित होंगी और चौबीसों घंटे नेविगेशन सहायता के लिए मौसम अवलोकन सेंसर से लैस होंगी।
यह प्रकाश स्तंभ परियोजना 8 अप्रैल, 2025 को IWAI और DGLL के बीच हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन (MoU) का परिणाम है। इन स्थलों को औपचारिक रूप से जून 2025 में DGLL को हस्तांतरित किया गया था, और अनुबंध दिए जाने के बाद 24 महीनों के भीतर इनके पूरा होने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय जलमार्ग-2 (NW-2): धुबरी से सदिया तक लगभग 891 किलोमीटर तक फैला यह जलमार्ग भारत के किसी भी अंतर्देशीय जलमार्ग का सबसे लंबा नौगम्य खंड है। यह पूर्वोत्तर राज्यों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


