प्रम्बानन मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार के लिए भारत ने इंडोनेशिया के साथ साझेदारी की
भारत और इंडोनेशिया ने दक्षिणी जावा के योग्याकार्ता विशेष क्षेत्र में प्रम्बानन मंदिर परिसर (Prambanan Temple complex) के जीर्णोद्धार के लिए साझेदारी की है। इंडोनेशियाई संस्कृति मंत्री फदली ज़ोन और ASI की टीम के बीच हुई बैठक में जावा (Java) स्थित इस 9वीं शताब्दी के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के संरक्षण पर चर्चा हुई।
- धार्मिक महत्व: यह परिसर त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु और शिव) को समर्पित है।
- विस्तृत परिदृश्य: इसमें केवल प्रम्बानन ही नहीं, बल्कि सेवु (Sewu) और प्लाओसन (Plaosan) मंदिर भी शामिल हैं।
दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत के प्रमुख जीर्णोद्धार कार्य
भारत ने “एक्ट ईस्ट” नीति के तहत कई देशों में ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है:
| देश | स्थल (Site) | मुख्य विवरण |
| कंबोडिया | अंगकोर वाट (Angkor Wat) | दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर। ASI ने 1986 से 1993 के बीच शुरुआती जीर्णोद्धार कार्य किया। |
| वियतनाम | माय सोन मंदिर (Mỹ Sơn) | प्राचीन चम्पा साम्राज्य के मंदिर। यहाँ खुदाई के दौरान ASI को प्राचीन शिवलिंग प्राप्त हुए थे। |
| म्यांमार | आनंद मंदिर और बागान पैगोडा | 11वीं-13वीं शताब्दी के स्मारक जो 2016 के भूकंप में क्षतिग्रस्त हो गए थे। |
| लाओस | वात फौ (Vat Phou) | एक प्राचीन खमेर-हिंदू शिव स्थल (बाद में बौद्ध उपयोग में परिवर्तित)। भारत ने दो चरणों में लगभग 41 करोड़ रुपये खर्च किए। |
महत्वपूर्ण बिंदु
- सांस्कृतिक कूटनीति: ये परियोजनाएं न केवल स्मारकों को बचाती हैं, बल्कि साझा हिंदू-बौद्ध विरासत के माध्यम से भारत के इन देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को भी मजबूत करती हैं।
- तकनीकी विशेषज्ञता: ASI की वैश्विक स्तर पर पहचान उसकी पत्थर संरक्षण और प्राचीन वास्तुकला को मूल रूप में बनाए रखने की क्षमता के कारण है।


