भारत ‘पैक्स सिलिका’ (Pax Silica) समूह में शामिल हुआ

भारत 20 फरवरी (2026) को ‘पैक्स सिलिका’ (Pax Silica) समूह में शामिल हो गया, जिससे वह अमेरिका और उन अन्य देशों के साथ जुड़ गया है जो इलेक्ट्रॉनिक्स और क्रिटिकल खनिजों (critical minerals) के लिए एक साझा आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ (AI Impact Summit) के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस समूह में भारत को औपचारिक रूप से शामिल करने वाले दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए। उनके साथ आर्थिक विकास, ऊर्जा और पर्यावरण के लिए अमेरिकी अंडरसेक्रेटरी ऑफ स्टेट जैकब हेलबर्ग भी मौजूद थे।

‘पैक्स सिलिका’ के अन्य हस्ताक्षरकर्ताओं में कनाडा, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ शामिल हैं। यह अमेरिका के नेतृत्व वाली एक पहल है जिसका उद्देश्य नए जमाने के क्षेत्रों, जैसे कि क्रिटिकल खनिजों में चीन के प्रभुत्व का मुकाबला करना है। चीन के इस दबदबे के कारण चीनी उत्पादों और अन्य जगहों पर निर्मित उत्पादों की कीमतों में एक बड़ा अंतर पैदा हो गया है।

अमेरिका के अनुसार, ‘पैक्स सिलिका’ का लक्ष्य “मित्र और विश्वसनीय” देशों को एक साथ लाना है ताकि “जबरन निर्भरता” (coercive dependencies) को कम किया जा सके, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए मौलिक” सामग्रियों और क्षमताओं की रक्षा की जा सके और यह “सुनिश्चित किया जा सके कि संबद्ध राष्ट्र बड़े पैमाने पर परिवर्तनकारी तकनीकों का विकास और तैनाती कर सकें।”

‘पैक्स सिलिका’ के तहत किए जाने वाले उपायों में शामिल हैं:

  • नए संयुक्त उद्यम (joint ventures) और स्ट्रेटेजिक सह-निवेश के अवसरों को आगे बढ़ाना।
  • संवेदनशील प्रौद्योगिकियों और क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर  को अन्य देशों के अनुचित पहुंच या नियंत्रण से बचाना।
  • विश्वसनीय प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम का निर्माण करना, जिसमें सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) प्रणाली, फाइबर-ऑप्टिक केबल, डेटा सेंटर, फाउंडेशनल मॉडल और एप्लिकेशन शामिल हैं।
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