‘गोल्डीलॉक्स’ दौर में भारतीय इकोनॉमी
नए साल की शुरुआत के साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। भारत अब $4.18 ट्रिलियन की जीडीपी (GDP) के साथ जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। शानदार विकास दर, नियंत्रित मुद्रास्फीति और बैंकिंग क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन के कारण विशेषज्ञ इसे भारतीय अर्थव्यवस्था का ‘गोल्डीलॉक्स’ (Goldilocks) दौर कह रहे हैं।
जापान को पीछे छोड़ा, अब जर्मनी पर नज़र
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने अपनी आर्थिक गति से दुनिया को चौंका दिया है:
- वर्तमान स्थिति: $4.18 ट्रिलियन की जीडीपी के साथ भारत चौथे स्थान पर।
- अगला लक्ष्य: अगले 2.5 से 3 साल में जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की तैयारी।
- 2030 का विज़न: अनुमान है कि 2030 तक भारत की अर्थव्यवस्था $7.3 ट्रिलियन तक पहुँच जाएगी।
दमदार विकास और न्यूनतम महंगाई
भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (Q2) में 8.2 प्रतिशत की शानदार वास्तविक जीडीपी ग्रोथ दर्ज की है।
- महंगाई पर लगाम: साल के अंत तक रिटेल महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की 2% की निचली सीमा से भी नीचे गिर गई है।
- बैंकिंग सेक्टर: मजबूत बैलेंस शीट और कम NPA के कारण बैंकिंग सेक्टर विकास को सहारा दे रहा है।
क्या है ‘गोल्डीलॉक्स’ अर्थव्यवस्था?
‘गोल्डीलॉक्स’ शब्द का उपयोग एक ऐसी आदर्श आर्थिक स्थिति के लिए किया जाता है जो ‘न बहुत गर्म हो और न बहुत ठंडी’।
- संतुलन: इसमें विकास दर अच्छी बनी रहती है लेकिन महंगाई बहुत अधिक नहीं बढ़ती।
- निवेश का माहौल: स्थिर ब्याज दरें और संतुलित मुद्रास्फीति के कारण यह इक्विटी मार्केट और विदेशी निवेश के लिए सबसे अनुकूल समय माना जाता है।
बेस ईयर (Base Year) में बदलाव की तैयारी
अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप डेटा की सटीकता बढ़ाने के लिए सरकार एक बड़ा कदम उठा रही है:
- नया आधार वर्ष: राष्ट्रीय खातों की गणना के लिए आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 करने पर काम चल रहा है।
- IMF की चिंताएं: इस बदलाव से अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा भारतीय GDP गणना की कार्यप्रणाली पर उठाई गई चिंताओं का समाधान होगा और डेटा अधिक पारदर्शी बनेगा।


