भारत ने जैव विविधता अभिसमय (CBD) को अपनी 7वीं राष्ट्रीय रिपोर्ट सौंपी
भारत ने जैव विविधता अभिसमय (CBD) को अपनी 7वीं राष्ट्रीय रिपोर्ट सौंपी है, जो 2030 के लिए निर्धारित वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों की दिशा में देश की प्रगति का एक विस्तृत विवरण प्रदान करती है।
रिपोर्ट का आधार और उद्देश्य
यह रिपोर्ट केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा तैयार की गई है। यह कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क (KMGBF) 2022 को अपनाए जाने के बाद से भारत की प्रगति का पहला पूर्ण मूल्यांकन है।
- लक्ष्यों का संरेखण: भारत ने अपनी राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (NBSAP) को अपडेट किया है, जिसमें अब 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य और 142 संकेतक शामिल हैं।
- वैश्विक संदर्भ: KMGBF के तहत 2030 तक दुनिया की 30% भूमि और समुद्र का संरक्षण, खराब पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली और प्रदूषण को कम करने जैसे 23 लक्ष्य निर्धारित हैं।
भारत की प्रमुख उपलब्धियां
रिपोर्ट में भारत द्वारा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में हासिल किए गए महत्वपूर्ण आंकड़ों को रेखांकित किया गया है:
| क्षेत्र | वर्तमान स्थिति / आंकड़ा |
| वन और वृक्ष आवरण | 8,27,357 वर्ग किमी (कुल भौगोलिक क्षेत्र का 25.17%)। |
| भूमि बहाली | 24.1 मिलियन हेक्टेयर भूमि बहाल की जा चुकी है या प्रक्रिया में है (2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर का लक्ष्य है)। |
| वन कार्बन स्टॉक | बढ़कर 7,285.5 मिलियन टन हो गया है (पिछली गणना से 81.5 मिलियन टन की वृद्धि)। |
वन्यजीव संरक्षण में सुधार
भारत के प्रमुख वन्यजीवों की आबादी में निरंतर सकारात्मक वृद्धि देखी गई है:
- बाघ (Tigers): भारत में बाघों की संख्या अब 3,167 है।
- एशियाई शेर और एक सींग वाले गैंडे: इनकी आबादी भी या तो स्थिर है या उसमें वृद्धि हो रही है।
जैव विविधता अभिसमय (CBD) के बारे में
जैव विविधता अभिसमय (CBD), जिसे 1992 के रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन में अपनाया गया था और जो 1993 से प्रभावी है, एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि है। इसमें वर्तमान में 196 पक्षकार (देश) शामिल हैं।
इस अभिसमय के तीन मुख्य लक्ष्य हैं:
- जैव विविधता का संरक्षण: प्राकृतिक आवासों और प्रजातियों की सुरक्षा करना।
- इसके घटकों का सतत उपयोग: संसाधनों का इस तरह उपयोग करना कि वे भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी बने रहें।
- आनुवंशिक संसाधनों से होने वाले लाभों का उचित और समान वितरण: विशेष रूप से विकासशील देशों और स्थानीय समुदायों के साथ लाभ साझा करना।
प्रमुख कार्यक्षेत्र और प्रोटोकॉल: CBD केवल जानवरों या पौधों तक सीमित नहीं है; यह संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र, प्रजातियों और आनुवंशिक संसाधनों को कवर करता है। इसके कार्यान्वयन को मजबूत करने के लिए दो महत्वपूर्ण पूरक समझौते (प्रोटोकॉल) अपनाए गए हैं:
- कार्टाजेना प्रोटोकॉल (Cartagena Protocol): यह मुख्य रूप से जैव-सुरक्षा (Biosafety) पर केंद्रित है, जो आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी (जैसे GMOs) से उत्पन्न जीवित संशोधित जीवों के सुरक्षित हस्तांतरण और उपयोग को सुनिश्चित करता है।
- नागोया प्रोटोकॉल (Nagoya Protocol): यह एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) से संबंधित है, जो आनुवंशिक संसाधनों तक पहुंच और उनके उपयोग से होने वाले लाभों के उचित बंटवारे के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है।


