भारत ने वर्ष 2026 के लिए किम्बरली प्रोसेस की अध्यक्षता संभाली

भारत ने वर्ष 2026 के लिए किम्बरली प्रोसेस (Kimberley Process – KP) बहुराष्ट्रीय व्यवस्था की अध्यक्षता संभाली है।

यह क्या है?

  • लक्ष्य: यह ‘कॉन्फ्लिक्ट डायमंड्स’ (Conflict Diamonds) या ‘रक्त हीरों’ के व्यापार को रोकने के लिए बनाया गया एक अंतरराष्ट्रीय ढांचा है।
  • कॉन्फ्लिक्ट डायमंड्स: ये वे कच्चे हीरे होते हैं जिनका उपयोग विद्रोही या उग्रवादी समूह वैध सरकारों को अस्थिर करने या युद्ध के लिए धन जुटाने हेतु अवैध रूप से करते हैं।

इतिहास और संरचना:

  • शुरुआत: इसकी नींव मई 2000 में दक्षिण अफ्रीकी देशों के बीच बातचीत से पड़ी।
  • प्रमाणीकरण योजना (KPCS): 2003 में 37 हस्ताक्षरकर्ता देशों के साथ इसे आधिकारिक रूप से लागू किया गया।
  • वर्तमान स्थिति: आज इसमें 60 प्रतिभागी (86 देशों का प्रतिनिधित्व) शामिल हैं, जो दुनिया के लगभग 99.8% कच्चे हीरे के उत्पादन को नियंत्रित करते हैं।

यह कैसे काम करता है? (KPCS प्रक्रिया)

  1. प्रमाणपत्र (Certificate): हीरों की प्रत्येक खेप (Consignment) के साथ एक वैध KP प्रमाणपत्र होना अनिवार्य है।
  2. प्रतिबंधित व्यापार: हीरों का व्यापार केवल उन देशों के बीच हो सकता है जो KP के प्रमाणित सदस्य हैं।
  3. डेटा शेयरिंग: सदस्य देशों के लिए उत्पादन और व्यापार से संबंधित सटीक आंकड़े साझा करना अनिवार्य है।
  4. त्रिपक्षीय व्यवस्था: इसमें सरकारें, हीरा उद्योग और नागरिक समाज (Civil Society) तीनों मिलकर काम करते हैं।

हीरा बाजार में भारत की स्थिति:

  • उत्पादन: अंगोला, बोत्सवाना, कनाडा और रूस जैसे देश 85% से अधिक हीरों का उत्पादन करते हैं।
  • भारत की भूमिका: हालांकि भारत हीरों का उत्पादक नहीं है, लेकिन यह कच्चे हीरों का सबसे बड़ा आयातक है। दुनिया के कुल आयात का लगभग 40% (मात्रा और मूल्य में) अकेले भारत में आता है।

चुनौतियाँ:

इस प्रक्रिया को अक्सर आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है, क्योंकि कई बार यह मानवाधिकारों के उल्लंघन और अवैध तस्करी को पूरी तरह रोकने में चुनौतियों का सामना करती है।

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