IISc ने ब्रेन को-प्रोसेसर पर “मूनशॉट” प्रोजेक्ट लॉन्च किया
भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) ने 4 मार्च को ब्रेन को-प्रोसेसर (brain co-processors) विकसित करने के लिए एक ‘मूनशॉट’ प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। ये को-प्रोसेसर न्यूरोमोर्फिक हार्डवेयर और एआई (AI) एल्गोरिदम को जोड़कर मस्तिष्क के कार्यों को बेहतर बनाने या उन्हें बहाल करने का काम करेंगे। इस परियोजना को प्रतीक्षा ट्रस्ट (Pratiksha Trust) द्वारा वित्तपोषित किया गया है, जिसकी स्थापना सेनापति ‘क्रिस’ गोपालकृष्णन और सुधा गोपालकृष्णन ने की है।
यह मूनशॉट प्रोजेक्ट एक बहु-विषयक (multidisciplinary) प्रयास है, जो IISc की ‘ब्रेन, कंप्यूटेशन और डेटा साइंस’ पहल द्वारा शुरू किए गए एक पायलट प्रोजेक्ट से विकसित हुआ है। इस कार्यक्रम में 20 से अधिक संकाय सदस्य (faculty members) शामिल हैं और इसे भी प्रतीक्षा ट्रस्ट का समर्थन प्राप्त है।
ब्रेन को-प्रोसेसर क्या है?
ब्रेन को-प्रोसेसर ऐसे AI-संचालित (कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित), क्लोज्ड-लूप उपकरण होते हैं जो मस्तिष्क की तंत्रिका गतिविधियों (न्यूरल एक्टिविटी) को निगरानी करते हैं, समझते हैं और आवश्यकता होने पर उन्हें उत्तेजित (स्टिमुलेट) भी करते हैं। इनका उद्देश्य मोटर नियंत्रण (शारीरिक गतिविधियों का नियंत्रण) और स्मृति जैसे मस्तिष्क के कार्यों को पुनर्वासित करना, बढ़ाना या बहाल करना है।
ब्रेन को-प्रोसेसर एक उभरती हुई तकनीक है, जिसका लक्ष्य मानव मस्तिष्क की प्राकृतिक क्षमताओं को बेहतर बनाना है, ताकि वे वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकें।
मुख्य उद्देश्य और कार्यप्रणाली
इस प्रोजेक्ट का प्राथमिक लक्ष्य ऐसे इम्प्लांटेबल (प्रत्यारोपण योग्य) और गैर-आक्रामक (non-invasive) ब्रेन को-प्रोसेसर विकसित करना है जो:
- तंत्रिका रिकॉर्डिंग (neural recordings) से मस्तिष्क की गतिविधियों को डिकोड (decode) कर सकें।
- एआई एल्गोरिदम के साथ इसे प्रोसेस (process) कर सकें।
- न्यूरल स्टिमुलेशन या न्यूरोफीडबैक के माध्यम से संकेतों को वापस मस्तिष्क में री-एनकोड (re-encode) कर सकें।
उपयोगिता और प्रभाव
- स्ट्रोक सर्वाइवर्स का पुनर्वास: इन को-प्रोसेसरों का उपयोग स्ट्रोक से बचे लोगों के संज्ञानात्मक पुनर्वास (cognitive rehabilitation) के लिए किया जाएगा, ताकि उनके ‘लक्ष्य-निर्देशित पकड़’ (reach and grasp) जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को बहाल किया जा सके।
- क्लोज्ड-लूप डिवाइस: ये एआई-संचालित उपकरण हैं जो मोटर कंट्रोल और याददाश्त जैसे मस्तिष्क कार्यों को ठीक करने या बढ़ाने के लिए तंत्रिका गतिविधि की निगरानी और व्याख्या करते हैं।
- प्राकृतिक क्षमताओं में वृद्धि: यह उभरती हुई तकनीक वास्तविक जीवन की स्थितियों में मानव मस्तिष्क की प्राकृतिक क्षमताओं को बढ़ाने पर केंद्रित है।
इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मस्तिष्क की समस्या-समाधान प्रक्रिया की गहरी समझ आवश्यक है। परियोजना का अंतिम उद्देश्य एक ऐसा उपकरण बनाना है जो मस्तिष्क के विभिन्न हिस्सों से जुड़कर सुचारू और समन्वित गतिविधियों को बहाल करने में मदद कर सके।
Source: IISc


