व्हाइट फास्फोरस क्या है?
पश्चिम एशिया में भीषण युद्ध के बीच, ह्यूमन राइट्स वॉच ने बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले इजरायल पर दक्षिण लेबनानी शहर के आवासीय क्षेत्रों में “अवैध रूप से” सफेद फास्फोरस (White Phosphorus) का उपयोग करने का आरोप लगाया है।
सफेद फास्फोरस क्या है? (WHO के अनुसार)
- दिखावट और गंध: सफेद (कभी-कभी पीला) फास्फोरस एक मोम जैसा ठोस पदार्थ है, जिसमें लहसुन जैसी गंध होती है।
- ज्वलनशीलता: यह $30\text{°C}$ से ऊपर के तापमान पर हवा के संपर्क में आते ही स्वतः जल उठता है। यह तब तक जलता रहता है जब तक कि यह पूरी तरह से ऑक्सीकृत न हो जाए या ऑक्सीजन की कमी न हो जाए।
- धुआं: जलते हुए फास्फोरस से घना, सफेद और जलन पैदा करने वाला धुआं निकलता है, जिसमें मिश्रित फास्फोरस ऑक्साइड होते हैं।
इसके उपयोग:
- सैन्य उपयोग: ग्रेनेड और तोपखाने के गोलों में रोशनी पैदा करने (illumination), धुएं का पर्दा (smokescreen) बनाने और आग लगाने वाले हथियार (incendiary) के रूप में।
- औद्योगिक उपयोग: फास्फोरिक एसिड, फास्फेट और अन्य यौगिकों के उत्पादन में।
- दैनिक उत्पाद: उर्वरक (fertilizers), डिटर्जेंट, आतिशबाजी और चूहे मारने वाली दवा (rodenticide) के निर्माण में।
मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव:
सफेद फास्फोरस संपर्क के सभी माध्यमों से मनुष्यों के लिए हानिकारक है:
- गहरे घाव: यह लिपिड (वसा) में अत्यधिक घुलनशील होता है, इसलिए यह ऊतकों के भीतर तक प्रवेश कर जाता है, जिससे गहरे घाव होते हैं जिन्हें ठीक होने में लंबा समय लगता है।
- विषाक्तता: इसे निगलने या त्वचा/म्यूकोसा के संपर्क में आने पर यह शरीर में विषाक्त मात्रा में अवशोषित हो सकता है।
कानूनी स्थिति: क्या यह एक रासायनिक हथियार है?
- रासायनिक हथियार कन्वेंशन (CWC): सफेद फास्फोरस CWC के तहत एक रासायनिक हथियार नहीं है, क्योंकि यह “जीवन प्रक्रियाओं पर अपनी रासायनिक क्रिया” के माध्यम से नहीं, बल्कि एक आग लगाने वाले एजेंट के रूप में कार्य करता है।
- CCCW प्रोटोकॉल III: इसका उपयोग ‘पारंपरिक हथियारों पर कन्वेंशन’ (CCCW) के प्रोटोकॉल III का उल्लंघन तब माना जा सकता है, जब इसे जानबूझकर नागरिक क्षेत्रों में सीधे मनुष्यों के खिलाफ एक ‘इन्सेंडियरी’ (आग लगाने वाले) हथियार के रूप में उपयोग किया जाए।
- अनुमत उपयोग: युद्ध के मैदान को रोशन करने या धुएं का पर्दा (smoke scree) बनाने जैसे अन्य कार्यों के लिए इसका उपयोग प्रतिबंधित नहीं है।
Source: WHO


