तमिलनाडु से सेलम सागो (सेलम साबूदाना) का निर्यात
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने तमिलनाडु के सेलम से 0.5 मीट्रिक टन जीआई-टैग्ड (GI-tagged) सेलम सागो (सेलम साबूदाना) के कनाडा निर्यात की सुविधा प्रदान की। मार्च 2023 में उत्पाद को भौगोलिक संकेत (GI) टैग मिलने के बाद से जीआई अधिकृत उपयोगकर्ता, SAGOSERVE द्वारा सीधे भेजा गया यह पहला निर्यात शिपमेंट है।
तमिलनाडु ‘टैपिओका सागो’ (Tapioca Sago) का सबसे बड़ा उत्पादक है, जिसे आमतौर पर साबूदाना के रूप में जाना जाता है। सेलम लंबे समय से देश के साबूदाना और स्टार्च उद्योग के केंद्र के रूप में पहचाना जाता रहा है। साबूदाना साबुदाने की जड़ों (टैपिओका) से प्राप्त किया जाता है और भारत के कई हिस्सों में एक मुख्य भोजन के रूप में उपयोग किया जाता है। सेलम सागो के लिए जीआई पंजीकरण मार्च 2023 में तमिलनाडु सरकार के अधीन SAGOSERVE द्वारा प्राप्त किया गया था।
सेलम का साबूदाना उद्योग बड़ी संख्या में किसानों की आजीविका का साधन है, जिनमें टैपिओका की खेती में लगे आदिवासी समुदाय भी शामिल हैं। पारंपरिक रूप से, सेलम सागो की आपूर्ति महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और पश्चिम बंगाल के व्यापारियों को की जाती रही है और इसे अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, वियतनाम और सिंगापुर जैसे देशों में निर्यात किया गया है। हालांकि, यह शिपमेंट स्वयं ‘जीआई अधिकृत उपयोगकर्ता सोसायटी’ द्वारा किया गया पहला प्रत्यक्ष निर्यात है।
साबूदाना मुख्य रूप से कसावा के पौधे (टैपिओका रूट) की स्टार्चयुक्त, कंद वाली जड़ों से बनाया जाता है। भारत में टैपिओका (Manihot Esculenta Crantz) की शुरुआत 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में हुई थी। तमिलनाडु राज्य टैपिओका उत्पादन (64%) और टैपिओका को स्टार्च व साबूदाने में संसाधित करने के मामले में देश में पहले स्थान पर है।


