गैलेक्सी मेंढक (Melanobatrachus indicus)
अपनी त्वचा पर ‘गैलेक्सी’ (आकाशगंगा) जैसे चमकते धब्बों के लिए मशहूर और दुनिया के सबसे दुर्लभ एम्फीबियन्स में से एक, गैलेक्सी मेंढक (Melanobatrachus indicus), अब फोटोग्राफरों के लालच का शिकार हो रहा है। हाल ही में आई एक वैज्ञानिक रिपोर्ट ने वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षणवादियों के बीच चिंता पैदा कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
‘हर्पेटोलॉजी नोट्स’ जर्नल में 17 दिसंबर, 2025 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, केरल के पश्चिमी घाट में सात गैलेक्सी मेंढकों का एक पूरा समूह गायब हो गया है। वैज्ञानिकों को आशंका है कि इन सभी मेंढकों की मृत्यु हो चुकी है।
इसका कारण: बड़ी संख्या में फोटोग्राफरों का उनके संवेदनशील आवास (Habitats) पर पहुँचना। फोटोग्राफरों द्वारा की गई छेड़छाड़ के कारण इन मेंढकों के व्यवहार में बदलाव आया, जिससे उनके खाने और प्रजनन (Breeding) की प्राकृतिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हुई।
सड़े हुए लट्ठों के नीचे छिपी एक अनमोल दुनिया
गैलेक्सी मेंढक बेहद शर्मीले और दुर्लभ जीव हैं। इनकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- आवास: ये विशेष रूप से पश्चिमी घाट के जंगलों में सड़े हुए लकड़ी के लट्ठों और पत्तों के नीचे रहते हैं।
- पहचान: इनका काला शरीर और उस पर नीले-सफेद धब्बे इन्हें किसी गैलेक्सी की तरह दिखाते हैं।
- इतिहास: इनकी खोज पहली बार 1878 में की गई थी, लेकिन इनके रहस्यमयी स्वभाव के कारण इनके बारे में आज भी बहुत कम जानकारी उपलब्ध है।
संरक्षण की स्थिति: खतरे की घंटी
इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) ने इस प्रजाति को पहले ही ‘विलुप्त होने के खतरे वाली’ (Endangered) श्रेणी में रखा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर इनके आवास के साथ मानवीय हस्तक्षेप इसी तरह जारी रहा, तो हम इस प्रजाति को हमेशा के लिए खो देंगे।
एथिकल फोटोग्राफी: अब और इंतज़ार नहीं
अध्ययन में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि ‘वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी’ का मतलब केवल एक अच्छी तस्वीर लेना नहीं, बल्कि जीव की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी होना चाहिए। रिपोर्ट में ‘नेचर और कंज़र्वेशन फ़ोटोग्राफ़ी’ के लिए कड़े एथिकल मानक बनाने की अपील की गई है ताकि:
- वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान न पहुँचे।
- फोटोग्राफी के दौरान जीवों को परेशान न किया जाए।
- दुर्लभ प्रजातियों की लोकेशन को सार्वजनिक करने से बचा जाए।


