FSSAI ने कॉफी-चिकोरी के मिश्रण के लिए कड़े मानक निर्धारित किए

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कॉफी और चिकोरी (chicory) के मिश्रण के लिए कड़े मानक निर्धारित किए हैं ताकि गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

मुख्य दिशा-निर्देश:

  • मिश्रण का अनुपात: कॉफी-चिकोरी मिश्रण में द्रव्यमान (mass) के अनुसार कम से कम 51% कॉफी होना अनिवार्य है।
  • लेबलिंग: पैकेट पर दोनों सामग्रियों का सटीक प्रतिशत स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए।
  • समय सीमा: 1 जुलाई 2026 से, यह प्रतिशत पैक के अगले हिस्से (Front of Pack) पर प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
  • भौतिक गुण: उत्पाद सूखा, मुक्त-प्रवाह (free-flowing) और किसी भी बाहरी योजक (additives) से मुक्त होना चाहिए।

चिकोरी (Cichorium intybus) क्या है?

चिकोरी यूरोप और एशिया मूल का औषधीय पौधा है। कॉफी में इसका उपयोग मुख्य रूप से कॉफी को गाढ़ा बनाने के लिए किया जाता है।

गुण और संरचना:

  • इनुलिन (Inulin): चिकोरी की जड़ में इनुलिन नामक एक स्टार्च जैसा पदार्थ होता है। इसके हाइड्रोलिसिस (hydrolysis) से फ्रुक्टोज प्राप्त होता है।
  • परीक्षण विधि: चूंकि शुद्ध कॉफी में इनुलिन नहीं होता, इसलिए इनुलिन की उपस्थिति का परीक्षण करके कॉफी में चिकोरी की मिलावट या उपस्थिति का पता लगाया जा सकता है।
  • स्वास्थ्य लाभ: यह बीटा-कैरोटीन का समृद्ध स्रोत है। इसमें हल्का रेचक (laxative) प्रभाव होता है और यह सूजन (swelling) को कम करने में मदद करता है।
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