NHAI ने “बी कॉरिडोर” बनाने की घोषणा की है
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अपने संधारणीय बुनियादी ढांचा कार्यक्रम (Sustainable Infrastructure Programme) के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे अपनी तरह की पहली पहल “पॉलिनेटर” या “बी कॉरिडोर” (Bee Corridors) बनाने की घोषणा की है।
इस पारिस्थितिकी-अनुकूल पहल का हिंदी अनुवाद और विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है:
बी कॉरिडोर (Bee Corridor): एक नई पारिस्थितिक पहल
- दृष्टिकोण में बदलाव: यह परियोजना राजमार्गों के किनारे केवल सजावटी पौधों के बजाय पारिस्थितिक वनस्पतियों (Ecological Vegetation) की ओर एक बड़े बदलाव का प्रतीक है।
- उद्देश्य: मधुमक्खियों और अन्य परागणकों (Pollinators) पर बढ़ते पारिस्थितिक दबाव को कम करना, जिससे परागण सेवाओं, कृषि उत्पादकता और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखा जा सके।
- विशेषता: इसमें मधुमक्खी-अनुकूल पौधों और फूलों के पेड़ों की निरंतर कतारें लगाई जाएंगी ताकि साल भर अमृत (Nectar) और पराग (Pollen) की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
परियोजना की मुख्य रूपरेखा
| विशेषता | विवरण |
| वनस्पति मिश्रण | इसमें पेड़ों, झाड़ियों, जड़ी-बूटियों और घासों का मिश्रण शामिल होगा। |
| प्राकृतिक आवास | फूलों वाले खरपतवारों को उगने दिया जाएगा और मृत लकड़ी तथा खोखले तनों जैसे प्राकृतिक तत्वों को सुरक्षित रखा जाएगा। |
| चुनिंदा प्रजातियाँ | नीम, करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश, जामुन और सिरिस जैसे पेड़ लगाए जाएंगे। |
| ब्लूमिंग चक्र | रोपण डिजाइन ऐसा होगा कि अलग-अलग मौसमों में फूल खिलें (Staggered Flowering), जिससे परागणकों को पूरे साल भोजन मिलता रहे। |


