बजट 2026-27: ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में रेयर अर्थ कॉरिडोर
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट 2026-27 के भाषण में भारत के तटीय राज्यों—ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में समर्पित रेयर अर्थ कॉरिडोर (Rare Earth Corridors) स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है।
इस घोषणा के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) योजना
यह प्रस्ताव हाल ही में घोषित उस योजना के अनुरूप है जिसका उद्देश्य सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) के निर्माण को बढ़ावा देना है।
- वित्तीय परिव्यय: ₹7,280 करोड़।
- लक्ष्य: प्रति वर्ष 6,000 मीट्रिक टन (MTPA) की एकीकृत REPM विनिर्माण क्षमता विकसित करना।
- चयन प्रक्रिया: प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से पांच लाभार्थियों का चयन किया जाएगा, जिनमें से प्रत्येक को 1,200 MTPA तक की क्षमता आवंटित की जाएगी।
REPM का महत्व और वैश्विक परिदृश्य
ये उच्च-शक्ति वाले मैग्नेट (REPM) इलेक्ट्रिक वाहन (EV), अक्षय ऊर्जा प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा अनुप्रयोगों जैसी आधुनिक तकनीकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
- वैश्विक एकाधिकार: वर्तमान में इनका निर्माण कुछ ही देशों में केंद्रित है। चीन इन मैग्नेटों के विनिर्माण और कच्चे माल के प्रसंस्करण दोनों में 90 प्रतिशत से अधिक नियंत्रण रखता है।
भारत में संसाधन और उत्पादन
भारत में, तटीय रेत खनिज (Beach Sand Minerals – BSM) दुर्लभ मृदा (Rare Earths) का प्रमुख स्रोत हैं।
- मोनाज़ाइट (Monazite): BSM अयस्क में मोनाज़ाइट नामक पदार्थ पाया जाता है, जो यूरेनियम और थोरियम युक्त एक फॉस्फेट खनिज है।
- IREL (India) Limited: परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत यह सार्वजनिक उपक्रम (PSU) भारत में मोनाज़ाइट खनिज से उच्च शुद्धता वाले ‘रेयर अर्थ ऑक्साइड’ का उत्पादन करता है।
- परिचालन: IREL वर्तमान में तीन स्थानों पर खनिज रेत के एकीकृत खनन और प्रसंस्करण की सुविधा संचालित कर रहा है, साथ ही दुर्लभ मृदा के निष्कर्षण और शोधन (Extraction and Refining) के लिए अलग इकाइयाँ भी कार्यरत हैं।


