EPFO ने 1,000 रुपये तक के बैलेंस वाले इनऑपरेटिव अकाउंट के लिए ऑटो-सेटलमेंट को मंजूरी दी
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने करोड़ों सदस्यों को राहत देते हुए निष्क्रिय खातों (Inoperative Accounts) में फंसे धन को वापस करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 2 मार्च को आयोजित अपनी 239वीं बैठक में, EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज ने ऐसे खातों के ‘ऑटो-सेटलमेंट’ (स्वतः निपटान) के लिए मंजूरी दे दी है।
निष्क्रिय खातों का ऑटो-सेटलमेंट: मुख्य बिंदु
बोर्ड ने एक पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है, जिसके तहत 1,000 रुपये या उससे कम की लावारिस शेष राशि वाले निष्क्रिय खातों का स्वतः निपटान किया जाएगा।
- प्रक्रिया: इसके लिए सदस्यों को किसी नए दावे या दस्तावेज़ की आवश्यकता नहीं होगी। पैसा सीधे उनके आधार-सीडेड और EPFO-लिंक्ड बैंक खातों में जमा कर दिया जाएगा।
- पायलट चरण: पहले चरण में लगभग 1.33 लाख खाते कवर किए जाएंगे, जिनमें कुल 5.68 करोड़ रुपये की राशि शामिल है। इसके परिणामों के आधार पर, इसे 1,000 रुपये से अधिक की राशि वाले खातों तक विस्तारित किया जाएगा।
EPF खाता ‘निष्क्रिय’ कब माना जाता है?
EPFO के नियमों के अनुसार, खातों को निष्क्रिय घोषित करने की प्रक्रिया इस प्रकार है:
- 55 वर्ष की आयु के बाद: यदि कोई सदस्य 55 वर्ष की आयु के बाद सेवानिवृत्त होता है, और अगले 3 वर्षों तक खाते में कोई अंशदान (Contribution) नहीं आता है, तो खाता निष्क्रिय माना जाता है।
- ब्याज का रुकना: एक निश्चित अवधि के बाद इन खातों में ब्याज मिलना बंद हो जाता है।
- 55 वर्ष से कम आयु: यदि सदस्य 55 वर्ष से कम उम्र का है और कोई अंशदान नहीं हो रहा है, तो उसके खाते पर 58 वर्ष की आयु तक ब्याज मिलता रहता है।
आंकड़ों पर एक नजर (31 मार्च, 2025 तक)
| विवरण | आंकड़े |
| कुल निष्क्रिय खाते | 31.83 लाख |
| कुल फंसी हुई राशि | ₹10,181 करोड़ |
| 20+ वर्षों से निष्क्रिय | ~22% खाते |
| 5-10 वर्षों से निष्क्रिय | ~41% खाते |


