पर्यावरण मंत्रालय ने हाथी-ट्रेन की टक्कर रोकने के लिए वर्कशॉप आयोजित की

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के प्रोजेक्ट एलीफेंट डिवीजन ने भारतीय रेल और भारतीय वन्यजीव संस्थान के सहयोग से 10–11 मार्च 2026 को देहरादून में “रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मौत को कम करने के लिए नीति क्रियान्वयन” विषय पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की।

इस कार्यशाला में लगभग 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें पर्यावरण मंत्रालय, रेलवे मंत्रालय, हाथी-आवास वाले राज्यों के वन विभागों के अधिकारी तथा वन्यजीव विशेषज्ञ शामिल थे।

कार्यशाला के प्रमुख निष्कर्ष

  • MoEFCC, Wildlife Institute of India, राज्य वन विभागों और भारतीय रेल द्वारा 127 रेलवे खंडों (कुल 3,452.4 किमी) का संयुक्त सर्वेक्षण किया गया।
  • हाथियों की आवाजाही और दुर्घटना जोखिम के आधार पर 14 राज्यों में 77 रेलवे खंड (1,965.2 किमी) को प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया।
  • इन क्षेत्रों में 705 शमन (Mitigation) संरचनाएँ बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।

प्रस्तावित शमन उपाय

इन प्राथमिकता वाले खंडों में निम्न संरचनाएँ बनाई जाएंगी—

  • 503 रैंप और लेवल क्रॉसिंग
  • 72 पुलों का विस्तार/संशोधन
  • 39 बाड़ या खाई (फेंसिंग/ट्रेंचिंग)
  • 65 वन्यजीव अंडरपास
  • 22 ओवरपास
  • 4 एग्जिट रैंप

तकनीकी उपाय

हाथियों की गतिविधि की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग भी किया जाएगा—

  • वितरित ध्वनिक प्रणाली (Distributed Acoustic System) आधारित इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम (IDS)
  • AI आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, जिसमें थर्मल और मोशन सेंसर लगे कैमरे हाथियों की मौजूदगी का पता लगाकर अलर्ट देंगे।

विशेष परियोजना

रानी-गर्भा-दीपोर बील हाथी गलियारा से गुजरने वाले अज़ारा-कामाख्या रेलवे लाइन (असम) के 3.5 किमी हिस्से को हाथियों के सुरक्षित आवागमन के लिए एलिवेटेड (ऊँचा) बनाया जाएगा।

पृष्ठभूमि

भारत में विश्व की एशियाई हाथियों की लगभग 60% आबादी पाई जाती है। लेकिन जंगलों से गुजरने वाली रेलवे लाइनों के कारण हाथियों की ट्रेन से टकराकर मृत्यु की घटनाएँ सामने आती रही हैं। यह पहल वन्यजीव संरक्षण और अवसंरचना विकास के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

Source: DD India

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