डायनामिक ग्राउंड वॉटर रिसोर्स 2025

केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) और राज्य सरकारों ने मिलकर देश के ‘डायनामिक ग्राउंड वॉटर रिसोर्स (गतिशील भौमजल/भूजल संसाधन) 2025’ का सालाना आकलन जारी कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में भूजल के पुनर्भरण (Recharge) और इसके इस्तेमाल के बीच का संतुलन अभी भी चिंताजनक बना हुआ है। हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति नियंत्रण में दिखती है, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर कई चुनौतियां उभर कर सामने आई हैं।

प्रमुख आंकड़े: रिचार्ज और एक्सट्रैक्शन का गणित

साल 2025 के आंकड़ों के अनुसार, भारत के पास मौजूद कुल जल संसाधन इस प्रकार हैं:

  • कुल वार्षिक ग्राउंड वॉटर रिचार्ज: 448.52 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM)।
  • सालाना इस्तेमाल करने लायक संसाधन: 407.75 BCM (प्राकृतिक डिस्चार्ज के बाद बचा हुआ)।
  • वास्तविक सालाना एक्सट्रैक्शन: 247.22 BCM (सिंचाई, घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए)।

ग्राउंड वॉटर दोहन का स्तर (Stage of Extraction)

देश के लिए भूजल दोहन का औसत स्तर (SoE) 60.63% आंका गया है। यह दर्शाता है कि कुल इस्तेमाल करने योग्य संसाधनों का 60% से अधिक हिस्सा हम निकाल रहे हैं। यह आंकड़ा देश के अलग-अलग हिस्सों में पानी की उपलब्धता और खपत के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है।

असेसमेंट यूनिट्स का वर्गीकरण: कहाँ है सबसे ज़्यादा खतरा?

देश भर की कुल 6,762 असेसमेंट यूनिट्स (ब्लॉक/तालुका/मंडल) का गहन विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट में इन्हें इनकी स्थिति के आधार पर पाँच श्रेणियों में बांटा गया है:

श्रेणीयूनिट्स की संख्याप्रतिशतस्थिति का अर्थ
ओवर-एक्सप्लॉइटेड73010.80%रिचार्ज से ज़्यादा पानी निकाला जा रहा है।
क्रिटिकल2012.97%जल स्तर बहुत तेज़ी से गिर रहा है।
सेमी-क्रिटिकल75811.21%सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
सेफ (सुरक्षित)4,94673.14%पानी का स्तर फिलहाल संतुलित है।
खारा पानी (Saline)1271.88%पानी की गुणवत्ता उपयोग योग्य नहीं है।

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