बारामूला के ज़ेहनपोरा में हुई 2000 साल पुराना बौद्ध स्थल की खोज

जम्मू और कश्मीर का एक शांत सा गाँव, ज़ेहनपोरा (Zehanpora), आज पूरी दुनिया की नज़रों में आ गया है। यहाँ पुरातत्वविदों ने 2,000 साल पुरानी एक ऐसी पुरातात्विक साइट की खोज की है, जिसने घाटी के भूले हुए बौद्ध अतीत की परतों को फिर से खोल दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस खोज को भारत की सांस्कृतिक विरासत के लिए “गर्व का पल” बताया है।

कुषाण काल के अवशेषों का रहस्य

ज़ेहनपोरा गाँव में यह खोज तब शुरू हुई जब पुरातत्वविदों ने इलाके में मौजूद कुछ साधारण दिखने वाले टीलों की खुदाई करने का फैसला किया। इस खुदाई में जो मिला, उसने विशेषज्ञों को हैरान कर दिया:

  • बौद्ध स्तूप और मठ: यहाँ कुषाण काल के भव्य स्तूपों और मठों के अवशेष मिले हैं।
  • प्राचीन इमारतें: मठों के अलावा यहाँ कई अन्य इमारतें भी मिली हैं, जो उस समय की वास्तुकला की गवाह हैं। ये अवशेष इस बात की पुष्टि करते हैं कि कश्मीर कभी बौद्ध धर्म का एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था।

‘हुविष्कपुरा’ से जुड़ा हो सकता है नाता

इतिहासकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि ज़ेहनपोरा कोई साधारण बस्ती नहीं थी। संभावना जताई जा रही है कि:

  1. यह कुषाण काल का एक प्रमुख धार्मिक और व्यापारिक केंद्र रहा होगा।
  2. इसका संबंध कुषाण साम्राज्य की रहस्यमयी राजधानी ‘हुविष्कपुरा’ (Huviskhpura) से हो सकता है, जिसके बारे में इतिहास में काफी चर्चा है लेकिन सटीक स्थान को लेकर हमेशा संशय रहा है।

ड्रोन सर्वे और नियोजित बस्ती के प्रमाण

इस खोज को पुख्ता करने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया गया। ड्रोन सर्वे के माध्यम से यह स्पष्ट हो गया है कि गाँव के आसपास के टीले प्राकृतिक रूप से नहीं बने थे, बल्कि वे इंसानों द्वारा बनाई गई संरचनाएं (Man-made) हैं। इससे यह साबित होता है कि यह एक सुनियोजित और व्यवस्थित प्राचीन बस्ती थी।

सांस्कृतिक विरासत का नया अध्याय

यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कश्मीर का बौद्ध इतिहास अक्सर अन्य ऐतिहासिक वृत्तांतों के पीछे ओझल रहा है। पुरातत्व विभाग के अनुसार, ज़ेहनपोरा की यह साइट न केवल पर्यटकों को आकर्षित करेगी बल्कि शोधकर्ताओं को मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के प्राचीन संबंधों को समझने में भी मदद करेगी।

error: Content is protected !!