डिक्लिपटेरा पॉलीमोरफा-अग्निरोधी पुष्प प्रजाति की खोज
पश्चिमी घाट में एक नई अग्निरोधी दोहरी खिलने वाली पुष्प प्रजाति की खोज की गई है, जो घास के मैदानों में लगी आग के कारण फूल खिलने लगती है और इसकी पुष्पक्रम संरचना ऐसी है जो भारतीय प्रजातियों में दुर्लभ है।
यह डिक्लिपटेरा जीनस की एक नई प्रजाति है, जिसे शोधकर्ताओं ने डिक्लिपटेरा पॉलीमोरफा (Dicliptera polymorpha) नाम दिया है। इस प्रजाति को तालेगांव-दभाड़े से एकत्र किया गया था, जो अपने घास के मैदानों के लिए जाना जाता है।
डिक्लिपटेरा पॉलीमोरफा एक विशिष्ट प्रजाति है, जो अपनी अग्निरोधी (fire-resilient), पायरोफाइटिक आदत और अपने असामान्य दोहरे खिलने (dual-blooming) के पैटर्न के लिए उल्लेखनीय है।
मानसून के बाद खिलने वाले अपने विशिष्ट फूलों के अलावा, यह प्रजाति घास के मैदानों में स्थानीय लोगों द्वारा लगाई जाने वाली आग से प्रेरित होकर दूसरी बार जोरदार विस्फोट के साथ खिलती है।
यह प्रजाति वर्गीकरण की दृष्टि से अद्वितीय है, जिसमें पुष्पक्रम यूनिट्स (साइम्यूल्स) होती हैं जो स्पाइकेट पुष्पक्रम (inflorescence) में विकसित होती हैं।
यह स्पाइकेट पुष्पक्रम संरचना वाली एकमात्र ज्ञात भारतीय प्रजाति है, जिसका सबसे करीबी प्रजाति अफ्रीका में पाती जाती है। इस प्रजाति का नाम इसके विविध रूपात्मक लक्षणों को दर्शाने के लिए डिक्लिपटेरा पॉलीमोरफा रखा गया है।
पश्चिमी घाट भारत के चार वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट में से एक है।