लद्दाख मैग्मैटिक आर्क (LMA)
वैज्ञानिकों ने उत्तर-पश्चिम हिमालय में लद्दाख मैग्मैटिक आर्क ( Ladakh Magmatic Arc: LMA) के विकास के रहस्य को सुलझा लिया है। यह लगभग 130 मिलियन वर्ष पुराना प्लेट विवर्तनिकी (plate tectonics) का एक रिकॉर्ड है, जो भारतीय और यूरेशियाई प्लेटों के बीच सबडक्शन (धंसने की प्रक्रिया), परिपक्वता और टकराव को दर्शाता है।
हिमालय के पृथ्वी पर सबसे ऊंचे पर्वत बनने से लाखों साल पहले, वह क्षेत्र जिसे अब लद्दाख कहा जाता है, नियो-टैथिस महासागर (Neo-Tethys Ocean) नामक एक सागर के ऊपर स्थित था। उस प्राचीन समुद्र के नीचे, पृथ्वी की भूपर्पटी (crust) की विशाल शिलाएं धीरे-धीरे मेंटल (mantle) में समा गईं, जिसे सबडक्शन (subduction) के रूप में जाना जाता है। इसी प्रक्रिया के कारण लद्दाख मैग्मैटिक आर्क (LMA) का निर्माण हुआ।
LMA ट्रांस-हिमालय में आग्नेय चट्टानों (igneous rocks) की एक पट्टी है, जिसका निर्माण जुरासिक से इओसीन काल (201.3 मिलियन वर्ष पूर्व से 33.9 मिलियन वर्ष पूर्व) के बीच हुआ था। वैज्ञानिकों ने अब चट्टानों के रसायन विज्ञान की जांच करके सबडक्शन की इस धीमी लेकिन शक्तिशाली गति का पता लगाया है जिसने LMA को आकार दिया।
उन्होंने पाया कि इसका निर्माण यूरेशियाई हाशिये (Eurasian margin) के नीचे नियो-टैथियन महासागरीय प्लेट के उत्तर की ओर झुककर धंसने (northward subduction) से हुआ था। LMA एक लंबे समय से विलुप्त हो चुकी ज्वालामुखी प्रणाली है जिसने कभी भारी मात्रा में पिघली हुई चट्टानों (लावा) का उत्पादन किया था, जो करोड़ों वर्षों में भूवैज्ञानिक गतिविधि के तीन प्रमुख चरणों के माध्यम से विकसित हुई।
Source: PIB


