कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य अब ‘इको-सेंसिटिव जोन’ घोषित

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राजस्थान की अरावली पर्वत श्रृंखला में स्थित प्रसिद्ध कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य को ‘इको-सेंसिटिव जोन’ (पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्र) घोषित करने की महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य न केवल इस क्षेत्र की दुर्लभ वनस्पतियों और जीवों का संरक्षण करना है, बल्कि अभयारण्य के आसपास रहने वाले स्थानीय समुदायों को भी समर्थन देना है।

वन्यजीवों के लिए बनेगा ‘शॉक एब्जॉर्बर’

मंत्रालय के अनुसार, अभयारण्य की सीमा से शून्य से एक किलोमीटर तक के दायरे को इको-सेंसिटिव जोन के रूप में चिन्हित किया गया है। यह क्षेत्र एक ‘शॉक एब्जॉर्बर’ के रूप में कार्य करेगा, जो उच्च सुरक्षा वाले संरक्षित क्षेत्रों और कम सुरक्षा वाले क्षेत्रों के बीच एक ‘ट्रांजिशन जोन’ (परिवर्तन क्षेत्र) बनेगा।

समृद्ध जैव-विविधता का घर

610 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला यह अभयारण्य राजसमंद, पाली और उदयपुर जिलों के हिस्सों को कवर करता है। यह क्षेत्र तेंदुआ, धारीदार लकड़बग्घा, जंगली बिल्ली, भारतीय पैंगोलिन, नीलगाय, जंगली सूअर और चिंकारा जैसे वन्यजीवों का सुरक्षित ठिकाना है। इसके अलावा, यहाँ पेंटेड फ्रैंकोलिन जैसी कई महत्वपूर्ण पक्षी प्रजातियाँ भी पाई जाती हैं।

इन गतिविधियों पर रहेगा प्रतिबंध

पर्यावरण की सुरक्षा के लिए इस क्षेत्र में कुछ व्यावसायिक गतिविधियों को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है:

  • व्यावसायिक खनन और पत्थर उत्खनन: अभयारण्य के आसपास अब किसी भी तरह का नया खनन या क्रशर इकाइयाँ नहीं लग सकेंगी।
  • प्रदूषणकारी उद्योग: वायु, जल, मिट्टी या ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की स्थापना पर रोक होगी।
  • अन्य प्रतिबंध: ईंट-भट्टों की स्थापना और नई पवन चक्कियों के निर्माण पर भी पाबंदी लगाई गई है।

स्थानीय समुदायों के हितों की रक्षा

अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया है कि इस घोषणा से स्थानीय निवासियों के पारंपरिक व्यवसायों पर कोई आंच नहीं आएगी।

  • क्षेत्र के 94 गांवों में रहने वाले लोगों की कृषि गतिविधियाँ और मकान निर्माण जैसे कार्य जारी रह सकेंगे।
  • राज्य सरकार को अगले दो वर्षों के भीतर एक ‘जोनल मास्टर प्लान’ तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

इस मास्टर प्लान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के लिए स्थायी आजीविका और कौशल विकास कार्यक्रमों को भी मजबूती दी जाएगी।

error: Content is protected !!