साइबर सुरक्षा ग्रैंड चैलेंज 2.0 (CSGC 2.0)
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने ‘साइबर सुरक्षा ग्रैंड चैलेंज 2.0’ (CSGC 2.0) के विजेताओं की घोषणा की है। डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (DSCI) के सहयोग से कार्यान्वित यह पहल, देश की साइबर सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और एक सुरक्षित डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
मुख्य विशेषताएं:
- पुरस्कार राशि: इस प्रतियोगिता में कुल ₹6.85 करोड़ का विशाल पुरस्कार पूल रखा गया था, जो इसे सरकारी स्तर पर सबसे बड़ी साइबर सुरक्षा नवाचार चुनौतियों में से एक बनाता है।
- प्लेटफार्म: जनवरी 2025 में लॉन्च की गई इस चुनौती को MyGov प्लेटफॉर्म पर होस्ट किया गया था।
- बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR): इस पहल की सबसे अनूठी विशेषता यह है कि विकसित किए गए समाधानों के IPR (बौद्धिक संपदा अधिकार) संबंधित स्टार्टअप्स के पास ही रहेंगे, जो उद्यमिता को बढ़ावा देने में मदद करेगा।
इन 6 महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर रहा फोकस:
नवाचार को बढ़ावा देने के लिए छह महत्वपूर्ण तकनीकी डोमेन चुने गए थे:
- API सुरक्षा: एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस को सुरक्षित करना।
- डेटा सुरक्षा: संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- वियरेबल डिवाइस सुरक्षा और गोपनीयता: स्मार्टवॉच और अन्य उपकरणों के डेटा को सुरक्षित रखना।
- क्लोन और फर्जी ऐप का न्यूनीकरण: नकली ऐप्स के खतरों को कम करना।
- खतरे की पहचान के लिए AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए साइबर हमलों को पहचानना।
- अगली पीढ़ी के बायोमेट्रिक सिस्टम: आधुनिक पहचान प्रणालियों को सुरक्षित बनाना।
विशेषज्ञ विश्लेषण
यह चुनौती भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘डिजिटल इंडिया’ विजन का हिस्सा है। जैसे-जैसे डिजिटल लेनदेन और कनेक्टिविटी बढ़ रही है, साइबर हमलों का खतरा भी बढ़ रहा है।
- स्टार्टअप इकोसिस्टम: IPR स्टार्टअप्स को देकर, सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि ये कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने उत्पादों को बेच सकें और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में खड़ी हों।
- AI की भूमिका: खतरे की पहचान (Threat Detection) के लिए AI का उपयोग करना भविष्य की सुरक्षा प्रणालियों के लिए अनिवार्य है, क्योंकि पारंपरिक सुरक्षा प्रणालियां अब आधुनिक ‘मालवेयर’ का मुकाबला करने में सक्षम नहीं हैं।


