भारत सड़क निर्माण में वाणिज्यिक तौर पर बायो-बिटुमेन का उत्पादन करने वाला पहला देश बना

केंद्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भारत की एक ऐतिहासिक उपलब्धि की घोषणा की है, जिसमें भारत कमर्शियल तौर पर बायो-बिटुमेन (Bio-Bitumen) का उत्पादन करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है।

इस महत्वपूर्ण नवाचार के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

बायो-बिटुमेन: क्या और कैसे?

  • परिभाषा: यह पौधों के तेल, खेती के कचरे या बायोमास जैसे नवीकरणीय कार्बनिक पदार्थों से बना एक टिकाऊ विकल्प है।
  • पारंपरिक बिटुमेन बनाम बायो-बिटुमेन: पारंपरिक बिटुमेन कच्चे तेल (Crude Oil) से प्राप्त होता है, जबकि बायो-बिटुमेन पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल स्रोतों से बनाया जाता है।
  • प्रक्रिया (पायरोलिसिस): इसे CSIR-CRRI और CSIR-IIP द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।
    • चावल के पुआल (Rice Straw) को पेलेट्स में बदला जाता है।
    • नियंत्रित थर्मल डीकंपोजिशन (पायरोलिसिस) के जरिए इसे बायो-ऑयल में बदला जाता है।
    • अंततः इसे बायो-बाइंडर के रूप में अपग्रेड किया जाता है, जो सड़कों के निर्माण (फ्लेक्सिबल पेवमेंट) के लिए उपयुक्त होता है।

प्रमुख लाभ और विशेषताएँ

  • मिश्रण क्षमता: प्रयोगशाला परीक्षणों के अनुसार, सड़क के प्रदर्शन से समझौता किए बिना पारंपरिक बिटुमेन के 20-30% हिस्से को बायो-बिटुमेन से बदला जा सकता है।
  • पर्यावरण संरक्षण: यह ‘पराली’ या फसल अवशेषों को जलाने की समस्या का समाधान करता है, जिससे वायु प्रदूषण में कमी आएगी।
  • आर्थिक बचत: भारत वर्तमान में अपनी बिटुमेन आवश्यकता का लगभग 50% आयात करता है। इस स्वदेशी तकनीक से विदेशी मुद्रा की भारी बचत होगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।
  • उपयोग में आसानी: इसे पारंपरिक उपकरणों और ‘हॉट मिक्स डामर’ (Hot Mix Asphalt) विधियों के साथ आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।
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