सरकार ने ‘मार्केट एक्सेस सपोर्ट’ (MAS) इंटरवेंशन लॉन्च किया
वाणिज्य विभाग (भारत सरकार) ने भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजारों में अपनी पैठ मजबूत करने में मदद देने के लिए बहुप्रतीक्षित ‘मार्केट एक्सेस सपोर्ट’ (MAS) इंटरवेंशन का शुभारंभ कर दिया है। अगले छह वर्षों (2025-26 से 2030-31) के लिए इस योजना हेतु ₹4,531 करोड़ का विशाल बजट आवंटित किया गया है। इसका प्राथमिक उद्देश्य नए निर्यातकों और MSMEs को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक आसान पहुंच प्रदान करना और भारतीय निर्यात के गंतव्यों में विविधता लाना है।
एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन (EPM) का बड़ा हिस्सा
MAS इंटरवेंशन, सरकार के महत्वाकांक्षी ₹25,060 करोड़ के ‘एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन’ (EPM) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- केंद्रीय कैबिनेट ने नवंबर में 2025-26 से 2030-31 की अवधि के लिए EPM को मंजूरी दी थी।
- इस मिशन के कुल 11 घटक (Components) हैं, जिन्हें 31 जनवरी 2026 तक पूरी तरह नोटिफाई कर दिया जाएगा।
- MAS को EPM की ‘NIRYAT DISHA’ सब-स्कीम के तहत लागू किया जा रहा है।
MSMEs और पहली बार निर्यात करने वालों पर विशेष ध्यान
इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका समावेशी ढांचा है। सरकार का लक्ष्य लाभार्थियों की श्रेणी में विविधता लाना है:
- अनिवार्य भागीदारी: यह सुनिश्चित करने के लिए कि छोटे उद्योग पीछे न छूटें, सरकार ने समर्थित आयोजनों (Events) में कम से कम 35 प्रतिशत MSMEs की भागीदारी अनिवार्य कर दी है।
- प्राथमिकता: पहली बार निर्यात (First-time exporters) करने वालों और प्रायोरिटी सेक्टर की फर्मों को विशेष वित्तीय और संस्थागत सहायता दी जाएगी।
बजट और वित्तीय सहायता का रोडमैप
MAS इंटरवेंशन तत्काल प्रभाव से लागू होगा। सरकार ने इसके शुरुआती साल के लिए निम्नलिखित योजना बनाई है:
- FY 2025-26 का बजट: पहले वर्ष के लिए ₹500 करोड़ का आवंटन किया गया है।
- कुल परिव्यय: 6 वर्षों की अवधि में ₹4,531 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
- लक्ष्य: छोटे बाजारों और नए निर्यात केंद्रों (New destinations) तक भारतीय उत्पादों को पहुँचाना।
इन गतिविधियों को मिलेगा सरकारी समर्थन
योजना के तहत निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट करने के लिए स्ट्रक्चर्ड सपोर्ट दिया जाएगा, जिसमें शामिल हैं:
- बायर-सेलर मीट (BSMs): अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ सीधा संवाद।
- ट्रेड फेयर और एग्जीबिशन: वैश्विक व्यापार मेलों में भागीदारी के लिए वित्तीय मदद।
- रिवर्स बायर-सेलर मीट (RBSMs): भारत में मेगा इवेंट्स का आयोजन जहाँ विदेशी खरीदार आएंगे।
- ट्रेड डेलिगेशन: उभरते हुए और प्राथमिकता वाले बाजारों में व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भेजना।
संयुक्त कार्यान्वयन तंत्र
इस विशाल मिशन को सफल बनाने के लिए वाणिज्य विभाग, MSME मंत्रालय और वित्त मंत्रालय मिलकर काम करेंगे। इसके अलावा, विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों, एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EPCs), कमोडिटी बोर्ड और विभिन्न उद्योग संघों का सक्रिय सहयोग लिया जाएगा।


