कोकोपीट: नारियल के छिलकों ने बदली तटीय शहरों की अर्थव्यवस्था

भारत ने ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ (कचरे से संपदा) के मंत्र को हकीकत में बदलते हुए नारियल के कचरे को एक उच्च-मूल्य संसाधन (High-Value Resource) में बदल दिया है। जो नारियल के छिलके कभी समुद्र तटों और शहरों के लिए बोझ थे, वे अब विदेशी मुद्रा अर्जित करने और लाखों लोगों को रोजगार देने का जरिया बन गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत अब वैश्विक नारियल कॉयर उत्पादन के 40% से अधिक हिस्से पर नियंत्रण रखता है।

कर्नाटक बना देश का नंबर-1 उत्पादक

कोकोनट डेवलपमेंट बोर्ड और कॉयर बोर्ड के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत में नारियल उत्पादन के परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है:

  • शीर्ष राज्य: कर्नाटक अब उत्पादन में केरल को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष पर पहुँच गया है।
  • प्रमुख योगदान: केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश मिलकर देश के कुल उत्पादन का 90% हिस्सा पैदा करते हैं।
  • कुल उत्पादन: 2023-24 और 2024-25 में देश का कुल उत्पादन 21,000 मिलियन यूनिट से अधिक हो गया है।
वैश्विक बाजार में भारतीय ‘कोकोपीट’ का डंका

बिना मिट्टी की खेती (Soilless Farming) के बढ़ते चलन ने भारतीय कोकोपीट की मांग को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है:

  • मार्केट साइज: ग्लोबल नारियल कॉयर बाजार 2025 में USD 1.45 बिलियन (लगभग ₹12,000 करोड़) तक पहुँचने का अनुमान है।
  • निर्यात वृद्धि: कोकोपीट का निर्यात सालाना 10-15% की दर से बढ़ रहा है।
  • प्रमुख खरीदार: चीन (37%) और अमेरिका (24%) सबसे बड़े आयातक हैं, जिसके बाद नीदरलैंड, दक्षिण कोरिया और स्पेन का नंबर आता है।
शहरी कचरा प्रबंधन का ‘स्मार्ट समाधान’

नारियल का छिलका शहरी गीले कचरे का 3-5% हिस्सा होता है, लेकिन प्रतिदिन पैदा होने वाले 1.6 लाख टन म्युनिसिपल कचरे के संदर्भ में यह एक बहुत बड़ी मात्रा है। तटीय शहरों में यह अनुपात 8% तक चला जाता है। अब स्वच्छ भारत मिशन (SBM-U 2.0) के तहत इसे प्रोसेस कर कोकोपीट, ऑर्गेनिक खाद और बायो-CNG में बदला जा रहा है।

सरकारी योजनाएं: उद्यमियों के लिए सब्सिडी की बौछार

सरकार नारियल कचरा प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाने के लिए भारी वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है:

  1. SBM-U 2.0: कचरा प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए केंद्र सरकार 25-50% की वित्तीय सहायता दे रही है।
  2. कॉयर उद्यमी योजना: ₹10 लाख तक के प्रोजेक्ट पर सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को 40% सब्सिडी मिल रही है।
  3. GOBARdhan योजना: नारियल अवशेषों को खाद और बायो-CNG में बदलने के लिए 500 नए वेस्ट-टू-वेल्थ प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं।
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