चीन ने ताइवान के चारों ओर शुरू किया ‘जस्टिस मिशन 2025’ सैन्य अभ्यास

पूर्वी एशिया में युद्ध के बादल एक बार फिर गहरे हो गए हैं। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने आज ताइवान जलडमरूमध्य में “जस्टिस मिशन 2025” नामक एक विशाल सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। इस युद्धाभ्यास के जरिए बीजिंग ने न केवल स्व-शासित द्वीप ताइवान को चारों तरफ से घेर लिया है, बल्कि अपनी अत्याधुनिक मिसाइल शक्ति का प्रदर्शन कर पूरी दुनिया को कड़ा संदेश दिया है।

हाइपरसोनिक मिसाइल YJ-20 का शक्ति प्रदर्शन

इस अभ्यास की सबसे बड़ी विशेषता चीन की तकनीकी परिपक्वता रही। PLA ने अपने शक्तिशाली टाइप 055 डिस्ट्रॉयर से हाइपरसोनिक YJ-20 मिसाइल की क्षमताओं का सफल प्रदर्शन किया। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में किसी भी आधुनिक रक्षा प्रणाली को भेदने में सक्षम है। इस कदम से चीन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस क्षेत्र में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को रोकने के लिए अपनी ऑपरेशनल मैच्योरिटी हासिल कर चुका है।

जापान की टिप्पणी से भड़का ड्रैगन

बीजिंग का यह आक्रामक रुख जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के हालिया बयान के बाद आया है। पीएम ताकाइची ने कहा था कि यदि चीन ताइवान के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई करता है, तो जापान की सेना इसमें शामिल हो सकती है। चीन ने इस बयान को अपनी संप्रभुता को चुनौती और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार देते हुए “जस्टिस मिशन 2025” के जरिए अपना गुस्सा जाहिर किया है।

ऐतिहासिक विवाद और बढ़ता तनाव

ताइवान, जो चीन के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित है, 1949 के गृह युद्ध के बाद से मुख्य भूमि चीन से अलग हो गया था। तब से वहां एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक सरकार है, लेकिन चीन इसे अपना अटूट हिस्सा मानता है और ज़रूरत पड़ने पर बल प्रयोग की धमकी देता रहा है।

  • 2022: पूर्व अमेरिकी स्पीकर नैन्सी पेलोसी की यात्रा के बाद तनाव चरम पर पहुंचा।
  • 2024: ताइवान के राष्ट्रपति लाई के शपथ ग्रहण समारोह के बाद चीन ने सैन्य दबाव और बढ़ा दिया।
  • 2025: “जस्टिस मिशन” को अब तक का सबसे बड़ा और आधुनिक घेराव माना जा रहा है।

वैश्विक चिंता और क्षेत्रीय स्थिरता

इस अभ्यास में चीन की नौसेना, वायु सेना और मिसाइल बलों के बीच अभूतपूर्व समन्वय देखा गया। विशेषज्ञों के अनुसार, चीन का उद्देश्य केवल ताइवान को डराना नहीं, बल्कि यह दिखाना है कि वह मस्कट और अन्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों पर अपना प्रभाव डाल सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस घटनाक्रम पर पैनी नज़र बनाए हुए है, क्योंकि ताइवान जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक मार्गों में से एक है।

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